कविता

कविता – ऊपरवाला जब हिसाब करेगा

ऊपरवाला जब खाता खोलेगा,
दिखावा नहीं,कर्म देखेगा।
कितने तीर्थ गए,नहीं देखेगा,
किसका दिल दुखाया,देखेगा।

केदारनाथ गए कितनी बार,
हरिद्वार गए कितनी बार,
मंदिरों का हिसाब नहीं होगा,
रिश्तों का हिसाब होगा।

किस रिश्ते में चाल चली,
किसके विश्वास को तोड़ा,
कितनों की आँखें नम कीं,
कितनों का दिल तोड़ा।

माथे का तिलक नहीं देखेगा,
हाथ की माला नहीं देखेगा,
हमारी नीयत और व्यवहार देखेगा,
हमारा इंसान होना देखेगा।

इसलिए रिश्ते सच्चे रखना,
किशन किसी का दिल मत दुखाना।
ईश्वर को खुश करना है तो,
पहले इंसानियत निभाना।

— किशन सनमुखदास भावनानी

*किशन भावनानी

कर विशेषज्ञ एड., गोंदिया