पढ़ाई के नाम पर बच्चों से छिनता बचपन
अख़बार की एक छोटी-सी खबर कई बार पूरे समाज के चेहरे से नक़ाब हटा देती है। “पढ़ाई के लिए कहने
Read Moreअख़बार की एक छोटी-सी खबर कई बार पूरे समाज के चेहरे से नक़ाब हटा देती है। “पढ़ाई के लिए कहने
Read Moreसड़क दुर्घटना मुआवज़े की तकनीकी व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संविधान के मूल दर्शन—समता, गरिमा और कल्याणकारी
Read Moreबुरा वक़्त अकेला नहीं आता,वह अपने साथ बहुत कुछ समेट ले जाता है।छीनता है रिश्तों का शोर,सहारे का भ्रम,और जाते-जातेएक
Read Moreभारत को सदियों से धर्म, आस्था और आध्यात्म की भूमि माना जाता रहा है। यहाँ धर्म केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड
Read Moreआँगन सूने हैं,दीवारें गिनती हैंउन पगचिह्नों कोजो कभी पड़े ही नहीं। जिन बेटियों कोजन्म से पहलेहमने चुपचाप विदा कर दिया,आज
Read Moreखिली-खिली हो ज़िंदगी, महक उठें अरमान।आशा है नव साल की, सुखद बने पहचान॥ दर्द-दुखों का अंत हो, विपदाएँ हों दूर।कोई
Read Moreनव वर्ष आते ही हमारे समाज में एक अजीब-सी हलचल शुरू हो जाती है। कैलेंडर बदलता है, मोबाइल पर शुभकामनाओं
Read Moreपल-पल खेल निराले हो,आँखों में सपने पाले हो।नए साल का सूर्योदय यह,खुशियों के लिए उजाले हो॥ मानवता का संदेश फैलाते,मस्जिद
Read Moreभारत में विवाह केवल दो व्यक्तियों का निजी संबंध नहीं होता, बल्कि वह समाज की सामूहिक चेतना, नैतिकता और सत्ता-संरचना
Read Moreभारत में बाल तस्करी आज केवल एक सामाजिक विकृति नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित, बहुस्तरीय और संगठित आपराधिक तंत्र का रूप
Read More