जब शहर तपते हैं
भारत आज तीव्र शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन—दो ऐसी प्रक्रियाओं के संगम पर खड़ा है, जो देश के सामाजिक, आर्थिक और
Read Moreभारत आज तीव्र शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन—दो ऐसी प्रक्रियाओं के संगम पर खड़ा है, जो देश के सामाजिक, आर्थिक और
Read Moreमौन अधर पर था कभी, नयनों में थी पीर।अब स्वर बने बोलती, बदली खुद तक़दीर॥ बंधन जितने बाँधते, उतनी बढ़ती
Read Moreकुर्सियों का किला बनाया,घर के बीचों-बीच।तीनों बच्चे खेल रहे थे,खुशियाँ लेकर नीड़। कुशन रखकर छत बना ली,दीवारें भी चार।छोटा-सा वह
Read Moreभारत की सांस्कृतिक पहचान केवल उसके इतिहास, भाषाओं और परंपराओं से नहीं बनती, बल्कि उन आस्था-स्थलों से भी निर्मित होती
Read Moreद्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद 1945 में जब संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की स्थापना हुई, तब विश्व की
Read Moreरूठो चाहे उम्र भर, रख लो लाख मलाल।अपनों के सँग मत कभी, चलना कुटिल कुचाल॥साथ न चलना हो चले, अपनी-अपनी
Read Moreप्रकृति जब अपना रौद्र रूप दिखाती है, तब वह मनुष्य की तकनीकी उपलब्धियों, आर्थिक प्रगति और प्रशासनिक दावों की वास्तविक
Read Moreनन्हे हाथों में बल्ला है,आँखों में अरमान।आँगन ही बन गया आज,सपनों का मैदान॥ हँसी-ठिठोली, दौड़-भाग,मस्ती की भरमार।जीत-हार से दूर हैं,प्यारा
Read Moreधरती डोली एक पल, काँपे घर-दरबार।रोया सारा देश फिर, टूटा जन-आधार॥ मलबों में दबते रहे, कितने सपने-प्राण।भाषण देते रह गए,
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