Author: *डॉ. सत्यवान सौरभ

मुक्तक/दोहा

नन्हा सीख रहा

१नन्ही-नन्ही आँख में,सपनों का संसार।टैब संग सीख रहा,उज्ज्वल हो व्यवहार॥२मन लगाकर देखता,नई-नई हर बात।खेल-खेल में सीखता,जीवन की सौगात॥३जिज्ञासा की रोशनी,चमके

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भाषा-साहित्य

क्या हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी साहित्यकारों की अपेक्षाओं पर खरी उतर रही है?

साहित्य किसी राष्ट्र की आत्मा का सबसे निर्मल स्वर है और साहित्यकार उस स्वर के अनथक साधक। वे शब्दों में

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