जो बोया सो काटते
दूध नहाए हैं सभी, फिर क्यों बिगड़े हाल?जो बोया सो काटते, फिर क्यों करे बवाल॥ सत्य छोड़कर चल दिए, छल
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Read Moreभारत में प्रतियोगी परीक्षाएं केवल रोजगार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि करोड़ों युवाओं के सपनों, परिवारों की उम्मीदों और सामाजिक
Read Moreरेंग रहे जिस ढंग से, बिल से निकले साँप।जागा सारा देश तब, लिया समय पर भाँप॥ छल-प्रपंच की ओट में,
Read Moreलोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, संवाद, असहमति और उत्तरदायित्व से भी संचालित होता है।
Read Moreभारत की शिक्षा व्यवस्था आज जिस मोड़ पर खड़ी है, वहाँ समस्या किसी एक व्यक्ति या किसी एक मंत्रालय तक
Read Moreदेश में जब भी नीट (NEET) परीक्षा होती है, उसके बाद केवल परिणामों की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की चर्चा
Read Moreसत्ता से बढ़कर सदा, जनता का विश्वास।सेवा, सच, समर्पण ही, नेतृत्व की आस॥ सत्ता चाहो या चुनो, जन-जन का सम्मान।स्वार्थ
Read Moreसत्ता पाने के लिए, रचें नए षड्यंत्र।देश विरोधी शक्तियाँ, फूँक रहीं विष-मंत्र॥ झूठ-फरेबी जाल में, उलझा सारा देश।स्वार्थों की इस
Read Moreनन्हे-नन्हे हाथ में,चिट्ठियों का मान।ढूँढ़ रहा प्रज्ञान है,बीते कल की शान॥ कागज़-कागज़ बोलते,जीवन के आधार।संघर्षों की रोशनी,मिली आज उपहार॥ शब्द
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