बाल कविता

खेलें फुटबाल

खेलों का राजा फुटबाल।
नब्बे मिनट का खेल कमाल।
गोल – गोल है गेंद हमारी।
खेले मिलकर टोली सारी।

ग्यारह – ग्यारह की दो टोली।
सभी खिलाड़ी हैं हमजोली।
एक गेंद, खाली मैदान।
और न आवश्यक सामान।

हाथ लगाना सख्त मना है।
पाँव से खेलो, नियम बना है।
गोल कीपर का खेल निराला।
करों से गेंद थामने वाला।

गोल में गेंद जो डाल दिखाए।
उसकी टीम को अंक दिलाए।
रेफरी सीटी खूब बजाए।
नियम सभी को याद दिलाए।

नित खेलो, तन हो तंदुरुस्त।
मन भी रहता चुस्त – दुरुस्त।
टीम भावना सदा बढ़ाना।
हार में भी सीखो मुस्काना।

जीत में कभी घमंड न करना।
हार मिले तो हिम्मत भरना।
खेल सिखाता है अनुशासन।
सरल संयमित बनता जीवन।

दुनिया का लोकप्रिय खेल।
शांति – एकता का है मेल।
आओ! हम खेलें फुटबाल।
बने स्वास्थ्य से मालामाल।

— गौरीशंकर वैश्य विनम्र

*गौरीशंकर वैश्य विनम्र

117 आदिलनगर, विकासनगर लखनऊ 226022 दूरभाष 09956087585

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