नन्हा डॉक्टर बन गया
नन्हे-नन्हे हाथ में, डॉक्टर वाला खेल।
हँसकर सबको बाँटता, खुशियों वाली रेल॥
शीशी, सूई, दवा लिए, करता खूब इलाज।
भोली-सी मुस्कान में, छिपा हुआ है राज॥
खिलौनों की दुनिया में, सपनों का संसार।
नन्हा मुन्ना सीखता, जीवन का व्यवहार॥
हँसते मुखड़े से सदा, महके घर-परिवार।
बच्चों से ही जगत में, रहता प्यार अपार॥
मासूमी की छाँव में, खिलते सुंदर फूल।
बचपन सबसे कीमती, रखना इसको मूल॥
नन्हा डॉक्टर बन गया, लेकर अपनी सूई।
देख-देख मुस्काते सभी, दादी, चाचा, भुई॥
खेल-खेल में सीखता, सेवा का सम्मान।
बच्चों के इन भाव से, रोशन हिंदुस्तान॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
