कविता

ग़ाँव – एक दर्पण

गाँवयानि गरीबीफटेहाल जिन्दगीऔरकुछ गन्दगी। गाँवयानि सन्तुष्टिमानवता -निश्छलताप्रकृति से नजदीकीछल रहित जिन्दगी। गाँवयानि परम्पराओं का निर्वाहईश्वर में आस्थाशिक्षा का अभावसंस्कारों का

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शिक्षा एवं व्यवसाय

कोचिंग संस्कृति के चौराहे पर शिक्षा

भारत में शिक्षा को सदियों से ज्ञान, संस्कार और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम माना गया है। शिक्षक को समाज में

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