कविता

होली में मिलते हैं

होली  के  दिन  इस  सब लोग , यहां  रंगों  से रंगीन  मिलते  हैं । वरना  दूसरे  दिन  जिंदगी  की , वजह से सब गमगीन मिलते हैं ।। बे परवाही  दिखती  है हर  शख्स , हर चेहरा की रंगों में डूबे खुशी से । किसी  दूसरे दिन  हर इंसान कुछ , अलग ख़्यालात जहीन मिलते हैं […]

कविता

जीवन उपवन सा खिले

जंगल करते हैं सदा, मानव पर उपकार। औषधियां-फल भेंटकर, दें जीवन संसार।। तरुवर माता-पिता सम, तरुवर मानव मीत। पोषण-सुख देते सदा, जीवन मधुरिम जीत।। पेड़ों को मत काटिए, देते सुखकर छांव। पेड़ बिना जीवन कहां, बंजर धरती गांव।। पौधों से जो जन करें, संतति सा व्यवहार। सुख, शांति संतुष्टि मिले, जीवन सदाबहार।। विटप धरा के […]

राजनीति

समग्र विकास व बदलाव लाने का बजट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा गठबंधन सरकार की सशक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट विगत एक फरवरी को प्रस्तुत कर दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह बजट कई मायने में ऐतिहासिक बजट है क्योंकि भारत के राजनीतिक व आर्थिक विश्लेषक बजट प्रस्तुत होने […]

सामाजिक

“द पावर ऑफ़ ए वुमन: लाइक ए टी बैग”

कतरा कतरा घुल रही हूँ दर्रा दर्रा पिघल रही हूँ पुर्ज़ा होते जिस्म से मैं.. ज़र्रा जर्रा निकल रही हूँ क्या आपने कभी यह कहावत सुनी है, “एक महिला चाय की थैली की तरह होती है,” जब तक वह गर्म पानी में न हो, आप कभी नहीं जान सकते कि वह कितनी मजबूत है! इस […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इश्क़ वाजिब ठिकाना नहीं है इसलिए दिल लगाना नहीं है टीस थोड़ी है बाकी अभी तक दर्द इतना पुराना नहीं है जिनके हाथों में हरदम नमक हो चोंट उनको दिखाना नहीं है आईने सी हमारी ये फितरत पत्थरों को बताना नहीं है छोड़ जाएं कहाँ इस जहां को कोई दूजा ज़माना नहीं है ‘जय’ सहेजो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

प्यार के गांव में इश्क की छांव में ये जीवन गुजर जाए पास महबूब हो छांव हो धूप हो वो दिल में उतर जाए कुछ कहें कुछ सुनें चार बातें करें हम से वो एक दो मुलाकातें करें मेरे तन मन को महका दे इस कदर बनके खुशबू बिखर जाए एक वो चांद है एक […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जो रो नहीं सकता है वो गा भी नहीं सकता जो खो नहीं सकता है वो पा भी नहीं सकता | सीने में जिसके दिल नहीं, दिल में नहीं हो दर्द इन्सान वो शख़्स ख़ुद को बता भी नहीं सकता आंसू गिरे तो लोग राज़ जान जायेंगे अपनों का दिया ज़ख़्म दिखा भी नहीं सकता […]

लघुकथा

सच्चा सौदा

शाम के छः बजे रमनलाल जी के घर के सामने श्वानों की लाइन लगी है. अच्छे विद्यार्थियों की भांति पूरी तरह से अनुशासित खड़े हैं सभी श्वान. अपनी बारी आने पर रमनलाल श्वान को चोला पहनाता है. वह चला जाता है और शांति से अगला श्वान चोला पहनने के लिए प्रस्तुत होता है. रमनलाल अपनी […]

कविता

पतझड़

कल तक तेरा साथ था मेरा कुदरत ने क्या खेल खेलाया जुदा हो चले हम तुमसे डाली पतझड़ ने रिश्ता    तुड़वाया कल तक हम तेरे साथ चले थे पर जब मेरी उम्र हुई       पुरी पीला पड़ गया चेहरा था मेरा ख्वाब अब तक रह गई अधूरी मौसम की हाथ कैसा निर्दयी है […]

लेख स्वास्थ्य

विश्व कैंसर दिवस:कैंसर से हारना नहीं, उसे हराना है !

अनीता ( बदला हुआ नाम ) 45 वर्षीय ग्रहणी है और दो जवान बच्चों की माँ है। एक दिन नहाते हुए अपने स्तन की जांच कर रही थी तो उसे मटर के दाने के आकर के सामान एक गाँठ महसूस हुई, तो वो एक पल के लिए ठिठुर गई, कुछ घबरा सी गयी। सोचने लगी […]