सामाजिक

फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड भी ध्यान दे

आजकल फिल्मों  में आपत्तिजनक और गाली-गलौज वाली भाषा एवं सिगरेट ,शराब का खुलेआम अभिनय का प्रयोग किए जाने लगा है।जबकि

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राजनीति

पासपोर्ट भी नहीं तो फिर क्या? नागरिकता के उलझे तारों में फंसा आम आदमी

कानूनी रूप से यह स्थिति और भी पेचीदा है। 1955 का नागरिकता कानून स्पष्ट करता है कि नागरिकता जन्म, वंश,

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