ग़ज़ल
ज़माने से थककर जो लौटे हैं घर को,उन्हें क्या ख़बर, घर भी बदलते होंगे। जो घरों से ही थककर निकलते
Read Moreगाँवयानि गरीबीफटेहाल जिन्दगीऔरकुछ गन्दगी। गाँवयानि सन्तुष्टिमानवता -निश्छलताप्रकृति से नजदीकीछल रहित जिन्दगी। गाँवयानि परम्पराओं का निर्वाहईश्वर में आस्थाशिक्षा का अभावसंस्कारों का
Read Moreतुम चाहती हो तुमको भूलूँ मैं भूलूँगामेरे गीत मुझे लौटा दो मैं जी लूँगा। गाये थे जो संग तुम्हारे मधुर
Read Moreगोरी घूंघट में हंसत, बदरी ओट मयंकछत पर छतरी तानकर, बालम लगें निशंकबालम लगें निशंक, अंक में रहि-रहि खींचेंनिरखत रंक
Read Moreकठिनाइयों से लड़ना होगाधैर्य नहीं हमको खोना होगा। बिना विचारे कोई कार्य न करें,चलें हमेशा बिना सहारे ही । मन
Read Moreचाहे जितना साहित्य लिख डालिये पर समाज में कुछ ऐसे दरिंदे रहते हैं जो दरिंदगी इतना कर जाते हैं जिन
Read Moreखामोश सड़कों परटूटे हुए सपनों की परछाइयाँधीरे-धीरे चलती हैं चाँद भी आज उदास हैरात की आँखों मेंएक अनकहा दर्द है
Read Moreभारत में शिक्षा को सदियों से ज्ञान, संस्कार और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम माना गया है। शिक्षक को समाज में
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