संस्थाओं पर भरोसा, लोकतंत्र की कसौटी
लोकतंत्र केवल चुनाव के दिन मत डालने की प्रक्रिया नहीं है। वह उस भरोसे का विस्तृत संसार है जिसमें नागरिक
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Read Moreझूठ सजा दरबार में, सच खड़ा लाचार।न्याय माँगता रह गया, पीड़ित बारंबार।। मंजिल पाने की धुन में, भूला जग व्यवहार।जीत
Read Moreस्वार्थों की आँधी चली, बिखरे नेह-प्रसंग।रिश्तों के आँगन हुए, अब सूने बेरंग।। आँसू पीकर जी रहा, मन में लिए सवाल।किसको
Read Moreभारतीय संस्कृति में मिट्टी के दीयों का स्थान केवल प्रकाश फैलाने वाले साधन के रूप में ही नहीं, बल्कि आस्था,
Read Moreएक घने जंगल के किनारे हरे-भरे पेड़ों से घिरा एक सुंदर मैदान था। मैदान के पास ही एक छोटा-सा तालाब
Read Moreदिल्ली के रामलीला मैदान से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा के खिलाफ ऐसी हुंकार भरी है,
Read Moreयुद्द से महंगाई बढ़ती है और विकास के पहिए रुक जाते है | सब चीज की परेशानी बढ़ती ही जाएगी
Read Moreवह अमीर तो बहुत था. क्या कुछ नहीं खरीद सकता था. आज भी वह कुछ खरीदने निकला. अलबत्ता रोज़ के
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