सद्बुद्धि की दो काज
ढुँढ रही है मेरी नजरें दूर दूर तकअवनि और अम्बर में भी आजकहाँ छुप गई है जग के मन की
Read Moreढुँढ रही है मेरी नजरें दूर दूर तकअवनि और अम्बर में भी आजकहाँ छुप गई है जग के मन की
Read Moreप्रकृति तेरी छटा है अजब निरालीकहीं अंबर पे दिखता मेघा कालीपूरब में सूरज की रूप है लालीऋतुओं की भरी है
Read Moreकुरसी का खेल जग में है निरालाबैठा इन्सान का होता बोलबालापक्ष विपक्ष का है मंजिल का कामप्रजातंत्र में कुरसी का
Read Moreमैं आजाद स्वछन्द परवाजनहीं चाहिये बंधन का रिवाजउड़ मड़राता नीले गगन मेंअपने जीवन में खुश मगन हैं ना किसी की
Read Moreसच्चाई की कद्र नहीं परझुठे का बोलवाला हैप्यासे की ग्लास है खाली परशराबी के हाथ भरा प्याला है कैसा है
Read Moreतन्हाई में कभी चुपके से आनामन मष्तिष्क पे दस्तक दे जानादिल की हवेली का खोलुँ मैं द्बारमुस्कुरा कर समां जाना
Read Moreगाँव जवार उजड़ रहे हैंशहर बना नई आशियानाखेती बाड़ी कौन करे अबफैशन का नया जमाना गाँव की मिट्टी रो
Read Moreबेईमानोंं के देश मेंबेईमान बना है राजाबेईमानी की नीत प्रखरबेईमानी है जहाँ काजा ईमान की डूबी नैय्याप्रजा हुए हलकानभूखे मरते
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