अंतस् की 85वीं मासिक काव्य-गोष्ठी
कौन हो जतन करूं, कौन हो रतन बनूंजा सै तोरी पगड़ी में जाऊं यूं जड़ी मैं..पूनम माटियाअंतस् की अनवरत मासिक
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Read Moreसाहित्य हितकारी होता है। “हितेन् सहितम् इति साहित्यम्” यह साहित्य की मूल परिभाषा है और जो साहित्य हितकारी नहीं होता
Read Moreसंयोजन-संचालन- पूनम माटियाअध्यक्षता – श्रीमती सोनम यादवसरस्वती-वंदना- श्री राम लोचनउपरोक्त के साथ अन्य वरिष्ठ कवि-शायरों द्वारा गीत, ग़ज़ल, कविता का
Read More28 मई की ‘नौ तपा’ की शाम 8 बजे आयोजित अंतस् की 82वीं गोष्ठी मशहूर शायर डॉ बशीर बद्र जी
Read Moreकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की पूण्य तिथि पर आयोजित हुई। दिनकर कविता को छायावादी कुहेलिका से प्रसन्न आलोक में
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