पिता की रौशनी
हाँ बेटा, मैं तुझे अंधेरे से बचाना चाहता हूँ,जीवन के कुछ मूल सूत्र समझाना चाहता हूँ। ये सही है, मेरा
Read Moreहाँ बेटा, मैं तुझे अंधेरे से बचाना चाहता हूँ,जीवन के कुछ मूल सूत्र समझाना चाहता हूँ। ये सही है, मेरा
Read Moreजब से मैंने होश संभाला,मां-बाप ने विद्यालय में डाला,गुरुजनों और साथियों ने साथ निभाया,शब्दों को कैसे गढ़ना है—यह हुनर सिखाया।
Read Moreयौवन कभी तो घटेगा,बिजली संयंत्र का बायलर कभी तो फटेगा,तब नहीं होगा मुझे किसी प्रकार का आश्चर्य,वो दिन भी होगा
Read Moreपरेशां अरमानों का रुख मोड़ दिया,कलम का वो निर्भीक दौर ही छोड़ दिया,सच की स्याही अब बोझिल लगने लगी,इसलिए झूठ
Read Moreनफ़रतों के इस अंधे दौर मेंयदि कोई मोहब्बत लुटा जाए,तो उसे सिर माथे बिठाइए,दुआओं में उम्र उसकी बढ़ा जाए। ये
Read Moreजब से घर में लड़की ने गड़बड़ी मचाई है,तभी से बूढ़ऊ की बुद्धि पूरी हड़बड़ाई है। अपना पैसा निकलवाने के
Read Moreजानता हूँ तुम्हें गिला हैकि मैं तुम्हारे बारे में क्यों नहीं लिखता,तुम्हारा चाहने वाला क्यों नहीं दिखता। हाँ, लिख तो
Read Moreबहे जा रहे हैं धारा के संग,अपनी ही मस्ती, अपने ही रंग।भूल गए हैं यह सरल-सी बात—इन राहों में हैं
Read Moreकुछ लोग भाईचारा बोने में माहिर होते हैं,और उसी भाई को चारे में बदल देते हैं। एक दिन उन्होंने मेरे
Read Moreमुझे देखना था—आग कहीं एक ही ओर तो नहीं,या फिर दूसरी दिशा भीउतनी ही तपिश से दहक रही है;क्योंकि आग
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