पैसों का बाज़ार और टूटते रिश्ते
संबंधों और अफसानों के बहुत सारे किस्से हैं,दूर हुए क्या पैसे हमसे दोयम दर्जे के रिश्ते हैं,खून खौलना,खून बोलना बनी
Read Moreसंबंधों और अफसानों के बहुत सारे किस्से हैं,दूर हुए क्या पैसे हमसे दोयम दर्जे के रिश्ते हैं,खून खौलना,खून बोलना बनी
Read Moreदेश की मिट्टी पुकारे,पर वो सुनते ही नहीं,ज़ख्म गहरे हैं बहुत,पर ख़्वाब बुनते ही नहीं,विकट परिस्थितियों में जिनकी आंखें भीगती
Read Moreमैं वो बरबाद इंसान हूंजिनका बरबादियों से नाता रहा है,रखी जिनसे उम्मीदबस देता दिलासा रहा है,राहें चुनी थी मैंने भीअपनों
Read Moreप्रशासन में बैठे कर्णधारों,वंचितों के हक़ की बातों पर खामोश क्यों हो?सिंहासन की अंधी गलियों में खोए हो,जनता के इस
Read Moreज्ञानचंदों कभी सत्ता से भी सवाल कीजिए,सिर्फ अपनों पर नहीं,हाकिमों पर भी मलाल कीजिए,चौक-चौराहों से लेकर बड़े सदन तक बवाल
Read Moreआदरणीय श्रोताओं,एक कर्मचारी की व्यथा सुना रहा हूं,तालियों से हुंकार भरिएगा, मैं चक्रव्यूह का रास्ता दिखा रहा हूं,सैलरी आते ही
Read Moreकिताब हाथों में लेकर बसलहरा देना काफी नहीं,भीड़ में खुद को जन-नायकदिखा देना काफी नहीं,मंच से ऊंचे स्वर में सिर्फ़
Read Moreआसान नहीं नास्तिक होना,भीड़ से अलग राह पर चलना,अंधेरे में दीया बनकर जलना,न ईश्वर का खौफ,न अल्लाह का डर,न जिन्न
Read Moreहाथों में मोबाइल थामे,एक कोने में बैठे हैं,काम-धाम से नाता टूटा,बस रील्स में ही खो ऐंठे हैं,आज सुबह की धूप
Read Moreउनका मशक्कत तो सिर्फ चुनावी समय में होता है,जो जीत गए हंसे पांच सालजनता तो रोने के लिए है इसलिएपूरे
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