सफर दर्द से गौरव का
कांच के रास्तों पर नंगे पैर चली है वो,रूढ़ियों की बेरहम आग में हर पल जली है वो,जिन्हें अमानवीय समाज
Read Moreकांच के रास्तों पर नंगे पैर चली है वो,रूढ़ियों की बेरहम आग में हर पल जली है वो,जिन्हें अमानवीय समाज
Read Moreचोंचलों की बरसात होने वाली है,नेताओं की बारात होने वाली है,जनता को आघात होने वाली है,चुनावी वादों की फिर से
Read Moreजात न पूछो साधु की पर उन्हें जात पूछने दो,पेट पकड़के सोइए उन्हें छप्पन भोग ठूंसने दो,ये सच है कह
Read Moreसंवैधानिक चाबुक को पीठ पर उनकेइस तरह से फिराओ,तड़ित बिजली से कम झटका न लगेऐसा महसूस कराओ,आये दिन करते रहते
Read Moreदिन रात मोबाइल म लगे हें,बाबू अउ नोनी मन,रील्स बना के नाचत गावत,भुलगे हें सब पढ़ई लिखई के धन,गली-खोर म
Read Moreजितना रोकना था रोक चुके,जितना टोकना था टोक चुके,अभी बनाना पहचान बाकी है,बिटिया की लंबी उड़ान बाकी है।देवी,देवता,आस्था,संस्कार,थामे हुए थी
Read Moreओ सिस्टम के बेईमानों,तुम कब तक आंख चुराओगे?संविधान की पावन प्रति को,कब तक धूल चटाओगे?हक़ खा रहे, लहू पी रहे,ओ
Read Moreदलित, पिछड़े और सवर्णहम सबको पास बुलाते हैं,हैं सभी नागरिक इस देश के,सबको गले लगाते हैं,इंसानियत ही धर्म है अपना,पीड़ा
Read Moreबहुत कर लिए मौज मस्तीअब आओ कुछ काम करें,बदनामी तो बहुत सह लिएअब तो चलो कुछ नाम करें,धुंध छांटकर आलस
Read Moreएक और आज़ादी चाहिएसरहदों की जंग तो जीत ली हमने,मगर घर में ये कैसा कोहराम है?जिस आज़ादी के लिए बहे
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