Author: राजेन्द्र लाहिरी

कविता

अभी उड़ान बाकी है

जितना रोकना था रोक चुके,जितना टोकना था टोक चुके,अभी बनाना पहचान बाकी है,बिटिया की लंबी उड़ान बाकी है।देवी,देवता,आस्था,संस्कार,थामे हुए थी

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