संघर्षों को भूल गया?
संघर्षों को तू भी भूल गया,मैं भी भूल गया,जिनकी उम्मीदों पर था भरोसा,उसी ने दिया शूल नया। तू भी जीए
Read Moreसंघर्षों को तू भी भूल गया,मैं भी भूल गया,जिनकी उम्मीदों पर था भरोसा,उसी ने दिया शूल नया। तू भी जीए
Read Moreकितनी सदियाँ बीत गईं, पर घाव अभी भी ताज़ा है,इंसान से पहले यहाँ अक्सर उसका जाति पूछा जाता है।बराबरी की
Read Moreमेरा देश ऐसा है भैया,जहाँ ज़मीर से पहले जाति जागता है,इसके धुन में बड़ा से बड़ा अपराधीअपने अपराधों संग खुलकर
Read Moreजो अटल है, अजर-अमर है,उसकी पीठ में घोंप रहे हो खंजर।अपनी निर्दयता के मद में चूर,कर रहे हो वनों को
Read Moreमत कह मुझे सीधासाधा, भोला या मासूम,वक्त पड़े तो दिखा सकता हूँअपना अनदेखा रौद्र रूप। कर लो जितनी मनमानियाँ करनी
Read Moreहाँ, लिखने की कोशिश कुछ विक्षिप्त,और मानने लगते स्वयं को दैदीप्य।उगलते भीतर का तीखा ज़हर,जिस पर अमल ला सकता कहर।
Read Moreबाकी सब कुछ भूलकर,जिसने किया जाति धर्म।वो अहमक क्या जाने,इंसानियत का मर्म। ऊंच-नीच की दीवारों में,जिसने खुद को कैद किया।नफरत
Read Moreशब्द कभी केवल शब्द नहीं होते,वे समय के दस्तावेज होते हैं,जो लिखे जाते हैंसदियों की चुप्पियों के बीच,और पढ़े जाते
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