ग़ज़ल
तेरे खातिर जमाने से ही तौबा कर लिया मैंने।कठिन राहों पे चल कर दिल में तेरे घर लिया मैंने।। ख़ुदा
Read Moreआपका बस मुझे आसरा चाहिए।यार दर मेरे खातिर खुला चाहिए।। कोई चाहे न चाहे मुझे ग़म नहीं।आप जैसी मगर दिलरुबा
Read Moreख़त आग बिन जलता नहीं।जलता नहीं उड़ता नहीं।। यूं रातों में सूरज कभी।हमको कहीं दिखता नहीं।। कितनी कोशिश कर लो
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