मुक्तक
रह रह कर याद आते हो तुम।
जेहन से क्यूं नहीं चले जाते हो तुम।।
और कितना याद आओगे मुझे।
ये बात भूलकर भी नहीं बताते हो तुम।।
— प्रीती श्रीवास्तव
रह रह कर याद आते हो तुम।
जेहन से क्यूं नहीं चले जाते हो तुम।।
और कितना याद आओगे मुझे।
ये बात भूलकर भी नहीं बताते हो तुम।।
— प्रीती श्रीवास्तव