धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सारा ब्रह्मांड उसी सर्वशक्तिमान (ईश्वर ,अल्लाह,गॉड, परमेश्वर) की अद्भुत रचना है

सारा ब्रह्मांड और समस्त मानव जीवन उसी एक सर्वशक्तिमान ईश्वर की अद्भुत रचना है, जिसे हम भाषा, धर्म और संस्कृति के अनुसार अलग-अलग नामों से पुकारते हैं,ईश्वर, अल्लाह, परमेश्वर या गॉड। परंतु यह नाम चाहे जो भी हों, उनकी सत्ता, शक्ति और प्रभाव एक समान हैं। फिर भी आज हमारे समाज में उसी एक सर्वशक्तिमान के नाम पर जाति, संप्रदाय, धर्म और विचारधारा के आधार पर भारी पैमाने पर वैमनस्य, कट्टरता, दंगे और असहिष्णुता दिखाई देती है। यह व्यथा केवल उन कुछ लोगों की संकीर्ण सोच और स्वार्थ की गहरी जड़ का परिणाम है, जो स्वयं  लाभ के लिए पूरे समाज को बांटने, संघर्ष में धकेलने और मनुष्यों के बीच दूरियां बढ़ाने का काम कर रहे हैं।जीवन एक अमूल्य उपहार है, और मृत्यु निश्चित। हमारे पास जो सीमित समय है, उसे व्यर्थ नफरत, फसाद और झूठे विवादों में बर्बाद करना  कहां तक  उचित है,। क्या हम वास्तव में इस  छोटे से जीवन को जी पा रहे हैं, या फिर किसी के स्वार्थ और तुष्टिकरण के कारण अपनी सोच, अपनी स्वतंत्रता और अपने अस्तित्व का मूल्य खो चुके हैं? इसका उत्तर हमें स्वयं ढूंढना होगा। हमारे धर्मों और संस्कृतियों की असली महानता प्रेम, सहिष्णुता, करुणा और मानवता की सेवा में निहित है। जब तक हम इन मूल तत्वों को अपनाएंगे नहीं, तब तक हमारा जीवन आधा अधूरा, असंतुष्ट और संघर्षपूर्ण ही रहेगा।आइए हम सब जाति, धर्म और संप्रदाय की सीमाओं से परे उठकर यह देखें कि हम सभी एक ही सर्वशक्तिमान ईश्वर की संतान हैं, और हमें इस एकता को अपने जीवन और समाज की नींव बनाना चाहिए। क्योंकि यही एकता ही हमारे जीवन को सचमुच सार्थक, मूल्यवान और खुशहाल बना सकती है। अगर हम एक-दूसरे के विचारों, विश्वासों और संस्कृतियों का सम्मान करेंगे, तभी हम सच्चे मानव कहलाएंगे। यही मानवता की सच्ची विजय है।समय अति सीमित है, और इस अमूल्य जीवन को हम नफरत और वैमनस्य में व्यर्थ गंवाने के बजाय प्रेम और समझदारी के साथ बिताएं। तभी हम अपने-अपने धर्म और विश्वास के असली सार को पहचान पाएंगे और सामाजिक समरसता, शांति और विकास की ओर कदम बढ़ा पाएंगे। इसलिए आज यह जिम्मेदारी हम सभी की है कि हम अपने दिलों में मिलन, आदर और सद्भाव की भावना जगाएं और एक बेहतर कल बनाएं।जीवन अमूल्य है, मृत्यु निश्चित, पर हमारा प्रयास और सोच हमें अमर बना सकता है। इस सच्चाई को स्वीकार कर, प्रेम और भाईचारे के साथ चलना ही मनुष्य होने का सच्चा विधान है।

— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह सहज

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।