गीतिका/ग़ज़ल

आसरा चाहिए

आपका बस मुझे आसरा चाहिए।
यार दर मेरे खातिर खुला चाहिए।।

कोई चाहे न चाहे मुझे ग़म नहीं।
आप जैसी मगर दिलरुबा चाहिए।।

छोड़ दूं मैं ये सारा जहांँ ओ सनम।
साथ मुझको फकत आपका चाहिए।।

तोड़ लाऊं सितारे कहें आप तो।
पर निगाहें झुकी सिर झुका चाहिए।।

बात मेरी अगर बेहतर ये लगे।
साथ महबूब का जन्मों का चाहिए।।

— प्रीती श्रीवास्तव

*प्रीती श्रीवास्तव

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