आसरा चाहिए
आपका बस मुझे आसरा चाहिए।
यार दर मेरे खातिर खुला चाहिए।।
कोई चाहे न चाहे मुझे ग़म नहीं।
आप जैसी मगर दिलरुबा चाहिए।।
छोड़ दूं मैं ये सारा जहांँ ओ सनम।
साथ मुझको फकत आपका चाहिए।।
तोड़ लाऊं सितारे कहें आप तो।
पर निगाहें झुकी सिर झुका चाहिए।।
बात मेरी अगर बेहतर ये लगे।
साथ महबूब का जन्मों का चाहिए।।
— प्रीती श्रीवास्तव
