बीज का स्वप्न
बीज का स्वप्न ले प्रारब्ध को, फूटे महि के बीच।स्वर्णिम मन में ख्वाब लिए तब, लेता आंखें मीच।नया परिवेश कैसा
Read Moreबीज का स्वप्न ले प्रारब्ध को, फूटे महि के बीच।स्वर्णिम मन में ख्वाब लिए तब, लेता आंखें मीच।नया परिवेश कैसा
Read Moreपहली सीढ़ी मौन की, बढ़े नहीं तकरार।मौन प्रदर्शन ही भला, झुक जाती सरकार।।पहली सीढ़ी मौन की, सब के सुनो विचार।निर्णय
Read Moreमन में हो सद्भावना, अच्छे सोच विचार।बोले मधुर बोल से, रखता शिष्टाचार।।मानव पावन सा लगे, सच में देव समान।सदा भले
Read Moreगिरती मकड़ी डोर से, जब तक उलझे तार।जिजीविषा नित देखिये, माने कभी न हार।।तिनका चुन चुन चोंच में, मूक हृदय
Read Moreखुदा के दर कभी जा के नहीं सिर तुम झुकाते हो।बड़े खुदगर्ज बंदे हो, जरूरत पर बुलाते हो। रहे सादा
Read Moreचलो सजनी चले आओ, मलेंगे रंग होली में।चले लेने तुझे आए, उठा लें आज डोली में। यही *फागुन रॅंगीला था,मिली
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