दहकता मौन
दहकता मौन कोई पीड़ा थी मन में – वह शब्दों का नहीं, ऑंसू बनकर भी नहीं गिरती। वह बस भीतर
Read Moreसमानता की पुकार… अवहेलना, अपमान मत करो किसी का, ऊॅंच-नीच, जाति-भेदभाव स्वार्थ का ताज़ा। मनुष्य के भीतर छिपी लालसा सुख-भोग
Read Moreनियम काल के अनुरूप जरूर बदलते रहते हैं.. इसलिए कि कोई भी सत्य जग में शाश्वत नहीं है परिवर्तन एक
Read Moreअनुभव एक सार हैमनुष्य के जीवन मेंविचार बनकर वहचलाएगा इंसान को,उसके साथ रहेगाअंतिम सांस तकजोड़ना है उसे अन्यलोगों के अनुभव
Read Moreजोड़ो अनुभव को अध्ययन से अनुभव एक सार है मनुष्य के जीवन में विचार बनकर वह चलाएगा इंसान को, उसके
Read Moreमुझमें आंसू की जो धारा है वह एक दिन प्रवाह बनकर फूट निकल आएगी बाहर शक्ति पुंज हूं मैं बेकार
Read Moreकहां से आती है हवा वह मन में फुरती लाती है हर बार चलता हूं तेज से तेज दुनिया के
Read Moreसीख नहीं पाया अब तक मैंने शब्दों को जाल में फंसाकर बाजार की दुनिया में ले आना एक संवेदना है
Read Moreचलता रहेगा यह द्वंव्द इस दुनिया में कब तक ? कहीं भूख है तो कहीं अपच व अजीर्ण कहीं मान
Read Moreबहता पानी क्या कहता है? अणु – अणु में फैली वायु हमें क्या सिखाती है? विशाल जग में व्याप्त धरती
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