कविता

कविता

युद्ध की विभीषिका

युद्ध की विभीषिका अबपड़ रही भारीतुम्हारे लिए। क्या फायदा मिलेगा बताओबम-बारुद फोड़करतुम्हारे लिए। जरुरी अब विचार करनायुद्ध का अत्याचारतुम्हारे लिए।

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