मजदूर
मैं श्रम का साथी, कहलाता हूं मजदूरखून पसीना बहाकर हर काम को करता हूं दूर।अपनी मिहनत की रोटी खाता हूं,कभी
Read Moreयूं कलियां कई निकलती हैं पौधों परपर क्या सबके किस्मत मेंचटखना होता हैखिलना होता हैखुशबू बिखेरना होता हैमहकना होता हैजीवन
Read Moreखोकर तुम मुझे कभी पा ना सकोगे जीवन मेंहम तुम्हें वहाँ मिलेगें जहाँ तुम आ ना सकोगेढुँढते रह जायेगी तेरी
Read Moreमैं जीना चाहती थी अपने सपनों के साथजहाँ कोई न हो सिर्फ प्रेम होजो मुझे दुनिया के हर दर्द से
Read Moreनफ़रतों के इस अंधे दौर मेंयदि कोई मोहब्बत लुटा जाए,तो उसे सिर माथे बिठाइए,दुआओं में उम्र उसकी बढ़ा जाए। ये
Read Moreयुद्ध की विभीषिका अबपड़ रही भारीतुम्हारे लिए। क्या फायदा मिलेगा बताओबम-बारुद फोड़करतुम्हारे लिए। जरुरी अब विचार करनायुद्ध का अत्याचारतुम्हारे लिए।
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