कविता

कविता

चिट्ठियों का मान

नन्हे-नन्हे हाथ में,चिट्ठियों का मान।ढूँढ़ रहा प्रज्ञान है,बीते कल की शान॥ कागज़-कागज़ बोलते,जीवन के आधार।संघर्षों की रोशनी,मिली आज उपहार॥ शब्द

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