कविता

कविता

मन का अगर एक कोना भी रुठ जाए तो उसकी उदास छाया पूरे मनस्थिति को विचलित कर अपने मन का हिस्सा बना लेती है जीवन की पगडंडियां हमेशा एक जैसी नहीं होती कभी इन राहों में आनंद की यात्रा का सुखद अनुभव तो कभी कांटों की जमीं पे नंगे पांव दौड़ने की चुभन भी समाहित […]

कविता

औरत

औरत हूं शायद इसलिए बार-बार तोड़ती हूं तुमसे मिले दर्द और उसके पश्चात अपने भीतर किए निश्चय,वादे को और पुनः तुम्हारे प्रेम की हल्की सी कंपन करती लहरों में खुद को बहाने को तैयार हो जाती हूं हर बार खुद को भ्रमित कर तुम्हारे उंगलियां में उंगलियां फंसा लेती हूं ऐसा कर खुद से नाराजगी […]

गीत/नवगीत

गीत

ठहर जाओ जो एकपल तुम मैं दिल की बात कह जाऊं। बहुत चाहा ना कहने की कैसे,, दिल को मैं समझाऊ।। ठहर जाओ….. छुपा रखी है मैंने तो, तेरी तस्वीर आंखों में। कितनी सुंदर,कितनी प्यारी, लगे है मुझको लाखो में।। तेरे ही नाम ये गजलें,, तेरे ही गीत मैं गाऊ।। ठहर जाओ जो एकपल तुम […]

कविता

तुम्हारे साथ….

सुनो ! उस एक मुलाकात को जी रही हूं और शायद उम्र के हर दहलीज पर जीती रहूंगी मन पर जो निशान पड़े थे मुहब्बत के पहले अहसास का वो मिटता ही नहीं वक्त के साथ और भी गहराता जा रहा सुनो ! बहुत दर्द सहता है ये दिल तुम्हारे साथ बिताए लम्हों को आज […]

कविता

तुम न आते…

तुम न आते तो अच्छा था आ के इतने करीब मेरे यूं चले न जाते तो अच्छा था दिल में बसने से पहले अरमानों के जगने से पहले यादों में समाने से पहले चले जाते तो अच्छा था आहिस्ता आहिस्ता उतरते गए सांसों में ऐसे मेरे पता ही न चला होश खोने से पहले होश […]

कविता

दिल के करीब

सुनो ! बहुत सी बातें तुम्हारी मेरे दिल के करीब है सोचती हूं उसे करती हूं बाते कभी कभी और बस आ जाते हो तुम करीब सच ही तो है सच्ची चाहत, और जिंदगी एहसासों में ही समाहित होती है बाकी तो सब औपचारिकता है तभी तो किसी खास के दूर होने पर भी उसे […]

कविता

मुलाकात

सुनो ! उस एक मुलाकात को जी रही हूं और शायद उम्र के हर दहलीज पर जीती रहूंगी मन पर जो निशान पड़ा था मुहब्बत के पहले अहसास का वो मिटता ही नहीं वक्त के साथ और भी गहराता गया बहुत दर्द सहता है ये दिल तुम्हारे साथ बिताए लम्हों को आज भी याद कर […]

कविता

लोग मिलते हैं

लोग मिलते हैं मिलते ही रहते है यह मिलने-जुलने की परंपरा जीवन-पर्यन्त चलता ही रहता है बस मिलने वालों के समय-समय पर चेहरे बदलते रहते हैं कुछ तो मिलकर कहीं खो जाते हैं कभी मुलाकात नहीं होती दुबारा यूँ कह लें यह मुलाकात भीड़ जैसी है पर होते हैं कुछ लोग एकांत और शांत झील […]

कविता

कभी यूं भी

कभी यूँ भी कभी तुम खुद चले आना कभी तुम मुझे बुला लेना फुरसत के उन पलों में तन्हा ना तुम कभी रहना चाहो तो याद कर लेना या फिर दिल कहीं और लगा लेना कुछ बातें तो आज भी अधूरी ही हैं तेरे बिना मिले अगर पूरी कर लेना कभी तुम खुद चले आना […]

कविता

उदास लड़की

उसकी उदासियां मेरे मुस्कुराते चेहरे को टोक रही थी और उसे देखकर मैं भी उदास हो गई ओह, कितना दर्द था उसकी आँखों में जैसे एक चंचल नदी बहते-बहते अचानक ठहर गई हो इतने बड़े घर में सब कुछ तो था पर कमी थी मुस्कुराहट की उन खुशियों की जो किसी मकान को घर बनाता […]