यह युग
यह युग ऐसा चल रहाजहाँ मौत मुँह खोले बैठी हैइंसानों की जिंदगी सूखे पत्तों की तरह हो गई हैकभी हवा
Read Moreयूं कलियां कई निकलती हैं पौधों परपर क्या सबके किस्मत मेंचटखना होता हैखिलना होता हैखुशबू बिखेरना होता हैमहकना होता हैजीवन
Read Moreतन्हाई में लिपटी हुई मैं करती बस याद तुम्हें बांध लिया तुमने मुझको है एहसासों जाल मेंबीत जाती है रातें
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