घर अब भी जाता हूँ
घर अब भी जाता हूँ,वही आँगन, वही दरवाज़ा—बस फ़र्क इतना है,अब कोई मेरा इंतज़ार नहीं करता। रसोई से खुशबू तो
Read Moreघर अब भी जाता हूँ,वही आँगन, वही दरवाज़ा—बस फ़र्क इतना है,अब कोई मेरा इंतज़ार नहीं करता। रसोई से खुशबू तो
Read Moreअपनी गलती और भगवान,दोनों मानो तो ही दिखाई देंगे।जो सिर झुकता है सच के आगे,उसी को रास्ते सुझाई देंगे। हम
Read Moreये कैसी जद्दोजहद से भरी है जिंदगी!किसी को सारे आकाश की मिली है खुशी,तो कोई मुट्ठी भर खुशी के लिए
Read Moreवो भी क्या दिन थे, हाँ भले ख्वाब अनगिनत थे !न मुश्किलों का डर,न बात बेबात का इतना असर! दिलों
Read More‘महिला आरक्षण’ का सपना फिर अधूरा रह गया,संसद के गलियारों में सच जल की तरह बह गया।बड़ी-बड़ी बातें करने वाले,
Read Moreयोग्यता का आकलन, अब नम्बर होने लगा,शिक्षा का स्तर स्कूल में, नम्बरों से होने लगा।ए सी बिल्डिंग मँहगी फ़ीस, आधुनिक
Read Moreतेरे दर्द को अल्फ़ाज़ दूंगामत सोच तू अकेला हैंहर कदम पर तेरा साथ दूंगा। दर्द का समुंदर जो तेरे अंदरनित्य
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