किसी को दुःख देना एक क़र्ज़ है
किसी को दुःख देना, एक ऐसा क़र्ज़ है,जिसका हिसाब रखता स्वयं सृष्टि का फ़र्ज़ है।समय की अदालत में हर कर्म
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Read More1 जुलाई – डॉक्टर्स डे पर विशेष कविता सफेद कोट में “सेवा” का दीप,हरेक पीड़ा में रहते हैं समीप।दिन हो,
Read Moreसूरज होते भीचारों ओर है घोर अंधेरा,रात के वक्त रोशनी में भी अंधेरा !खंडहर से दिलऔर रेगिस्तान से चित्त में
Read Moreभरी दुपहरी मेंयौवन से भरपूरएक युवतीदूधमुहें बच्चे कोलटकाये हुए फटी साड़ी में लिपटीप्रत्येक कार के पास पहुंचती हाथ फैलाकरकुछ खाने
Read Moreअलसित मन की वेदना, पीड़ा तब बन जाए,अंतर्द्वंद्व का तिक्त जल, सिर से ऊपर आए।आत्ममंथन से हो सके, खुद अपनी
Read Moreएक चेहरा ही काफी हैं! रंग दिखाने के लिए।फिर क्यूँ ? चेहरें पे चेहरा लगाके घुमते हैं लोग।। आगे कुछ,
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