कविता

पनी गलती और भगवान

अपनी गलती और भगवान,
दोनों मानो तो ही दिखाई देंगे।
जो सिर झुकता है सच के आगे,
उसी को रास्ते सुझाई देंगे।

हम खुद से ही भागते रहे,
आईनों से आँखें चुराते रहे,
जब ठहरे एक पल सच्चाई में,
अपने ही चेहरे समझाई देंगे।

हर दुआ में मांगते रहे उसे,
जो भीतर ही कहीं बसा था,
जब दिल के दर पे दस्तक दोगे,
वो खुद ही दर खोल दिखाई देंगे।

गुनाहों का बोझ उठाए फिरते,
किस्मत को हरदम कोसते रहे,
जब मानोगे अपनी भूलें तुम,
रास्ते खुद-ब-खुद बन जाएँगे।

ना मंदिर, ना मस्जिद में ढूँढो,
ना भीड़ में उसका पता पूछो,
जब झांकोगे अपने अंदर तुम,
वो हर धड़कन में समाई देंगे।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh

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