कविता

बंधन

उसने पूछा – कैसे हो
मैने कहा – सब बढ़िया है
अपना दुःख-दर्द छिपाने का
यह एक पुराना जरिया है

चेहरे पर मुस्कान थी
अंदर एक तूफान था
उपर से मुखर था
अंदर से बेजुबान था

खामोशी को न पढ़ा करो
दबे जज्बातों का समंदर है
टूटे ख्वाहिशों ने रोके कदम
शोर बहुत अंदर है

बस थोड़ी देर क्या रूका
परवरिश बदनाम हो गयी
अब चाहता हूं सोना
शिकवा सरे आम हो गयी

कौन सा बंधन है
यह कैसा रिश्ता है
न नाकाम हो रहा
न मुकाम तक पंहुच रहा

— श्याम सुन्दर मोदी

श्याम सुन्दर मोदी

शिक्षा - विज्ञान स्नातक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से प्रबंधक के पद से अवकाश प्राप्त, जन्म तिथि - 03•05•1957, जन्म स्थल - मसनोडीह (कोडरमा जिला, झारखंड) वर्तमान निवास - गृह संख्या 509, शकुंत विहार, सुरेश नगर, हजारीबाग (झारखंड), दूरभाष संपर्क - 7739128243, 9431798905 कई लेख एवं कविताएँ बैंक की आंतरिक पत्रिकाओं एवं अन्य पत्रिकाओं में प्रकाशित। अपने आसपास जो यथार्थ दिखा, उसे ही भाव रुप में लेखनी से उतारने की कोशिश किया। एक उपन्यास 'कलंकिनी' छपने हेतु तैयार

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