आत्म-मंथन
मैं–मैं में नहीं, मुझसे हूँ।हिम्मत नहीं है मुझमेंफिर भी कहूँगी।समझ नहीं है मुझमेंफिर भी लिखूँगी।अक्सर लोग निकाल देते हैंमेरे विचार
Read Moreहां मैं लिखता हूंसिर्फ लिखने के लिए नहींअपने जज्बातों केइज़हार के लिए भी हां मैं लिखता हूंहर अल्फ़ाज़ में तुमकोमगर
Read Moreजन्म जमांतर की मेरीअतृप्त इच्छाएंमुझे छूने लगी है। देख कर तुमकोमुझ में प्रेम जिज्ञासाफिर उत्पन्न होने लगी है। तुम्हारे अस्पर्श
Read Moreजी रहा हूँ जीवनबड़ी ही शिद्दत सेक्या मेरी पीड़ा काकारण बन तुममुझे शून्य करोगे ? हारा तो कभीथा ही नहीं
Read Moreमैं मंदिर गयामैं मस्जिद गयामेरी रगों मेंमोहब्बत का गीतफिर भीज़रे ज़रे मेंबहता गया । इश्क विश्कथोड़ा-थोड़ाहम भीकिसी न किसी सेकरते
Read Moreकांगड़ा हिमाचल प्रदेश. भारत द्वारा पंजीकृत संस्था महात्मा गांधी ग्लोबल पीस फाउंडेशन ने साहित्य के माध्यम से विश्व स्तर पर
Read More