निश्चल संवेदना
बदलते वक्त के साथबहुत कुछ बदलता देखामित्र को शत्रु बनतेशत्रु को मित्र बनते देखा।जानता भी नहीं था जिनकोउनको अपना बनते
Read Moreबदलते वक्त के साथबहुत कुछ बदलता देखामित्र को शत्रु बनतेशत्रु को मित्र बनते देखा।जानता भी नहीं था जिनकोउनको अपना बनते
Read Moreरोज झुक जाता हूंमैं शिव के आगेमांग लेता हूंहर दुआ में तुम को। ना मांग पाऊंअगर कभी तुमकोतो मांग लेता
Read Moreहां मैं लिखता हूंसिर्फ लिखने के लिए नहींअपने जज्बातों केइज़हार के लिए भी हां मैं लिखता हूंहर अल्फ़ाज़ में तुमकोमगर
Read Moreजन्म जमांतर की मेरीअतृप्त इच्छाएंमुझे छूने लगी है। देख कर तुमकोमुझ में प्रेम जिज्ञासाफिर उत्पन्न होने लगी है। तुम्हारे अस्पर्श
Read Moreजी रहा हूँ जीवनबड़ी ही शिद्दत सेक्या मेरी पीड़ा काकारण बन तुममुझे शून्य करोगे ? हारा तो कभीथा ही नहीं
Read Moreमैं मंदिर गयामैं मस्जिद गयामेरी रगों मेंमोहब्बत का गीतफिर भीज़रे ज़रे मेंबहता गया । इश्क विश्कथोड़ा-थोड़ाहम भीकिसी न किसी सेकरते
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