मन का दर्पण
दर्पण हमारे जीवन का हिस्सा है,मगर मन का दर्पण पूर्ण स्वायत्त शुभचिंतक हैजिसे हम आप देखना नहीं चाहते देखते भी हैं,
Read Moreदर्पण हमारे जीवन का हिस्सा है,मगर मन का दर्पण पूर्ण स्वायत्त शुभचिंतक हैजिसे हम आप देखना नहीं चाहते देखते भी हैं,
Read Moreउस अनजान को देखकर हुआ मुझे दर्द,देखा उन्हें तो लगा, दिल में छिपा है बहुत सारा दर्द।आँखों में नमी, हाथों
Read Moreसंबंधों और अफसानों के बहुत सारे किस्से हैं,दूर हुए क्या पैसे हमसे दोयम दर्जे के रिश्ते हैं,खून खौलना,खून बोलना बनी
Read Moreहर आंदोलन में विदेशी हाथ,ये तो बहुत ही पुराना राग है।जनता पूछ रहीं रोटी का प्रश्न,किसी साज़िश का संवाद है।
Read Moreदेश की मिट्टी पुकारे,पर वो सुनते ही नहीं,ज़ख्म गहरे हैं बहुत,पर ख़्वाब बुनते ही नहीं,विकट परिस्थितियों में जिनकी आंखें भीगती
Read Moreपिताएक रिश्ता भर नहीं होताबल्कि एक पूरा जीवन होता हैजो अपने लिए नहींबल्कि जीते है अपने परिवार के लिए ।
Read Moreबेटी का बाप हूँहाँ, एक बेटी का बाप हूँऔर मुझे वंश की दुहाई न दोन उद्धार कीन मुखाग्नि कीमैं कोई
Read Moreक्या रावण का अंत हुआ ?इस प्रश्न का उत्तर हाँ भी है और न भी,फर्क तो बस नजरिए का है।वैसे
Read Moreकब जलेगा मन का रावण?प्रश्न बड़ा विचारणीय हैक्योंकि आज यह प्रश्न हम ही नहींखुद रावण और मित्र यमराज भी पूछ
Read Moreहर मन में अब रावण रहता।बाहर राम-राम बस कहता।।देखा नहीं कभी निज भीतर।उड़ा रहा औरों को तीतर।। कहें मित्र यमराज
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