कविता

कारगिल विजय दिवस

छब्बीस जुलाई का दिन हमें,
वीरों की गाथा याद दिलाता है।
कारगिल की उस रणभूमि का,
हर कण शौर्य सुनाता है।
कितनी माँओं की गोद उजड़ गई,
कितनी बहनों की राखी तरस गई।
कितनी सुहागिनों की माँग उजड़ गई,
कितनी खुशियाँ पल भर में बिखर गईं।
पर्वत की ऊँची चोटी पर,
कितने वीर अमर हो गए।
भारत माँ की आन बचाते,
अपने प्राण न्योछावर कर गए।
जब तिरंगे में लिपटी अर्थी आई,
हर आँगन अश्रुओं से भर गया।
नवविवाहित दुल्हनों का सिंदूर मिटा,
हर सपना पल में बिखर गया।
माँ के दूध की लाज निभाकर,
देश का गौरव बढ़ा गए।
अपने रक्त की हर बूँद से,
भारत का मस्तक ऊँचा कर गए।
उन वीरों की माताओं को,
बहनों और वीरांगनाओं को प्रणाम।
कारगिल के अमर जवानों,
आपको शत-शत नमन, बारंबार प्रणाम।।

— गरिमा लखनवी

गरिमा लखनवी

दयानंद कन्या इंटर कालेज महानगर लखनऊ में कंप्यूटर शिक्षक शौक कवितायेँ और लेख लिखना मोबाइल नो. 9889989384

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