कविता

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तरुण

तरुण अवस्था जीवन धारा।नव उमंग से जगमग सारा।।शक्ति अपार संग तरुणाई।समय-समय पर ले अँगड़ाई।। श्रद्धा भाव नमामि-नमामी।तरुण हमारे नव अनुगामी।।तरुणाई

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कविता

डिजिटल युग में पुस्तकों का भविष्य

कल रात जब यमराज मुझे शुभरात्रि कहने आयातो मैंने डिजिटल युग में पुस्तकों केभविष्य वाला सवाल उसके सामने उठाया,बंदा खूँटा

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कविता

वृक्षों की रक्षा का, संकल्प का विधान है त्यौहार ‘हरेला’

​देवभूमि की शान है त्यौहार ‘हरेला’,प्रकृति का वरदान है त्यौहार ‘हरेला’, मिट्टी के कण-कण में बसी,खुशहाली की पहचान है ‘हरेला’।

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