अर्द्धनारीश्वर
मैं हूँ स्त्री, मैं ही पुरुष, अर्द्धनारीश्वर की हूँ कृति,फिर क्यों जग के इस आँगन में, होती हमारी दुर्गति? हाँ
Read Moreमैं हूँ स्त्री, मैं ही पुरुष, अर्द्धनारीश्वर की हूँ कृति,फिर क्यों जग के इस आँगन में, होती हमारी दुर्गति? हाँ
Read Moreबारिश की बूंदों को जलाना आ गयाक्या कहें उनको भी हराना आ गयातीखे शब्द मेरे, पन्ने झेल नहीं पाए औरजेठ
Read Moreआप सभी को बधाइयाँ शुभकामनाएँ हैं क्योंकि आज गंगा दशहरा है इस दिवस की भी औपचारिकता निभाइए।और कुछ तो आप कर नहीं
Read Moreतप्त धरा को सुकून मिलता,वर्षा की दो बूंदों से,सूखे पेड़ों को हरियाली,नव पल्लव के स्पर्शों से।दरिया को भी चैन मिलता
Read Moreजब किसी के आँसू पोंछोतो समझो ईश्वर हँसता है,टूटे मन को जब जोड़ो तुम,हर दिल में सूरज बसता है। करुणा
Read Moreजिस्म के मर जाने से रिश्ते मरा नहीं करतेघड़े में छेद हो जाये तो घड़े भरा नहीं करतेरूह निकल जाती
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