विश्वास की डोर टूटी
विश्वास की डोरी टूट गई, सपनों की दुनिया छूट गई,जिस हाथ में मेहन्दी सजनी थी, मृत्यु छाया लूट गई। जिसने
Read Moreविश्वास की डोरी टूट गई, सपनों की दुनिया छूट गई,जिस हाथ में मेहन्दी सजनी थी, मृत्यु छाया लूट गई। जिसने
Read Moreशिक्षा बोली — मैं चरित्र हूँ, विवेक हूँ, प्रकाश हूँ,परीक्षा बोली — मैं अंक हूँ, रैंक हूँ, विशेष अधिकार हूँ।
Read Moreजो अटल है, अजर-अमर है,उसकी पीठ में घोंप रहे हो खंजर।अपनी निर्दयता के मद में चूर,कर रहे हो वनों को
Read Moreआज रात प्रभु श्रीराम जी अभी अपने शयनकक्ष में पहुँचे ही थे कि पीछे से यमराज भी पहुँच गए, उन्हें
Read Moreये हम कहां जा रहे है? संवेदनाहीन, भावशून्य, पिशाच वृत्ति से लिपट, मानव जीवन की अस्थियां ले, संस्कारों की धज्जियां
Read Moreकम में खुश रहिए, खुशी कम नहीं होगी,मन की यह दौलत कभी कम नहीं होगी।महलों की चमक से जीवन नहीं
Read Moreढलती शाम का सफ़रसांझ ढली है, सूरज लाल,पेड़ों के पीछे छुपा गुलाल।कच्ची सड़क पर उड़ती धूल,घर लौट रहे हैं सब
Read Moreमत कह मुझे सीधासाधा, भोला या मासूम,वक्त पड़े तो दिखा सकता हूँअपना अनदेखा रौद्र रूप। कर लो जितनी मनमानियाँ करनी
Read More14 अगस्त, 1947 को, भारत का हुआ विभाजन था।हो गए असंख्य लोग बेघर, क्रूरतापूर्ण विस्थापन था। कोटिक जन थे शरणार्थी
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