कविता

कविता

गाँव हृदयहीन नहीं होता

हृदयहीनलोग नहीं होते,पूरा गाँव नहीं होता। ये तो होते हैं कुछ चालाक,मतलबपरस्त,राजनीति के धूर्त,जो अपनी खोपड़ी की योजनाओंको देना चाहते

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