Author: सुरेश मिश्र

गीतिका/ग़ज़ल

धूर्त शंकराचार्य, तुम्हारी ऐसी तैसी

ढोंगी, खल, नादान, तुम्हारी ऐसी-तैसीसनातनी अपमान, तुम्हारी ऐसी-तैसी तुमको सुनकर खुद भोले शंकर विचलित हैंफ्रॉड, अघी, बेइमान, तुम्हारी ऐसी-तैसी करपात्री

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