कुण्डली
सिसक-सिसककर रो रहा, तानाशाह मुनीरसही निशाने पर नहीं,लगा एक भी तीरलगा एक भी तीर, पीर किसको बतलाएजिनपिंगवा भी आज नमो
Read Moreचमचे कहते फिर रहे, पप्पू बहुत कमालजहां पड़ें पग आपके, होता वहीं धमालहोता वहीं धमाल, चाल उसकी है ऐसीबड़े बड़ों
Read Moreकाम काज कुछ भी नहीं, खर्च हज़ारों लाखसंसद की महिमा घटी, नेताओं की शाखनेताओं की शाख, राख कर दिए लुटेरेसंसद
Read Moreजंतर-मंतर के लिए,लगे रहे दिन रातझारखण्ड के लिए वे, करें न कोई बातकरें न कोई बात, गजब की है बेशर्मीअब
Read Moreदेश की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘महाकवि वाण प्रतिष्ठान’ द्वारा पं. छैलबिहारी ‘वाण’ की स्मृति में दिया जाने वाला ‘महाकवि वाण
Read Moreमाफी मांगा वह पुनः, रागा जिसका नामझूठ झूठ बस झूठ ही, बकना जिसका कामबकना जिसका काम,शरम ना इसको आएबहुरुपिए से
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