कविता

वैभव ही वैभव

बस, ‘पंद्रह बरस’ की उम्र में ऐसा तूफ़ान उठा,
हर गली-मोहल्ले में बस वैभव का नाम गूंजा।
छोटे से कंधों पे सपनों का ये आसमान लिए,
गेंदबाजों ने आउट करने क्या-2 जतन किए।

बल्ला जब उसके हाथों में बिजली बन जाता,
हरेक चौका उम्मीदों का दीप नया जलवाता।
छक्कों की बरसात से मैदान भी है दहक उठे,
जब दर्शकों के चेहरें गर्वित होकर चमक उठे।

सिर्फ रन नहीं थे, वो जज़्बा भी दिखलाता था,
हर ‘शॉट’ में भारत का भविष्य मुस्कुराता था।
जब गेंद हवा में जाती तो दिल भी उड़ते जाते,
खिलाड़ियों के पुराने ‘रिकॉर्ड’ पीछे छूट जाते।

पैंसठ छक्कों की गूंज आसमान तलक पहुँची,
क्रिस गेल की ताकत भी उसके आगे है छोटी।
प्लेऑफ में ही तूफानी पचास की चमक ऐसी,
प्रत्येक क्रिकेट प्रेमी की धड़कन बन गई वैसी।

सिर्फ उनतीस गेंदों में वैभव ने 97वें रन ठोके,
हर गेंदबाज़ के हौसले उसने पल भर में रोके।
उसके हरेक प्रहार में ‘आत्मविश्वास’ छलकता,
जैसे कोई एक नया सूरज धरती पर चमकता।

— संजय एम तराणेकर

संजय एम. तराणेकर

जन्म वर्ष 1968 कवि, स्वतंत्र लेखक व टिप्पणीकार। शिक्षा स्नातक एवं गायन में 1986 में विद् किया होकर केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद् द्वारा हिन्दी आषुलिपि प्रतियोगिता में वर्ष 1992 प्रषस्ति-पत्र प्राप्त। विशेष रूचि-बॉलीवुड फिल्में एवं संगीत, पुस्तक समीक्षा एवं राजनीति। मैं मूलतः मध्य प्रदेश के स्वच्छता में हैट्रिक लगा चुके एवं चार बार नंबर वन बनें स्मार्ट सिटी इन्दौर का निवासी हूँ। 1990 के दशक में लेखन में मन रमने लगा और ‘पत्र संपादक के नाम‘ से अपनी प्रारंभिक शुरूआत की। लेखकीय सुकून कितना संतोष देता है, इसकी बात ही कुछ और है। युवा होने पर फिल्मी कलाकारों की तरफ झुकाव ने फिल्मों पर आलेख लिखने की प्रेरणा दी। इसमें मेरी रूचि भी थी। विशेषकर पुराने फिल्मी कलाकारों के जीवन से सम्बंधित आलेखों पर अधिक ध्यान आकर्षित रहा। बावजूद इसके लघु कथा व कविता (बतौर युवा कवि आकाशवाणी इन्दौर में कविता पाठ के भी कई अवसर प्राप्त हुए है।) के अलावा सामयिक, सामाजिक एवं राजनैतिक विषयों पर समय-समय पर अपनी लेखनी को आयाम देने के प्रयास आज भी अनवरत हैं। अब तक विभिन्न समाचार-पत्रों में मुख्य रूप से बॉलीवुड/सिनेमा की साप्ताहिक मेगजीनों में आलेखों एवं पुस्तक समीक्षाओं का प्रकाशन हो चुका है। इनमें ‘लोकमत समाचार-आकर्षण व शो टाईम, राजस्थान पत्रिका-बॉलीवुड, पंजाब केसरी व दैनिक ट्रिब्यून के मनोरंजन, राज एक्सप्रेस-राज सिनेमा, द सी एक्सप्रेस-सी सिनेमा, हरि-भूमि के रंगारंग व रविवार भारती, चौथा संसार के बॉलीवुड, बीपीएन टाईम्स के शो बीपीएन व तरंग, लोकदशा के पर्दा-बेपर्दा व विविधा, नव-भारत एवं स्वतंत्र भारत के अलावा कई स्थानीय समाचार-पत्रों में भी आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। वहीं ‘स्वतंत्र वार्ता एवं डेली हिन्दी मिलाप‘ में कई वर्षो तक नियमित रूप से लिखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 31, संजय नगर, इन्दौर-452011 मध्य प्रदेश, (वार्ता+वाट्स एप) 98260.25986 ईमेलः s.taranekar@rediffmail.com, Facebook – https://www.facebook.com/Taranekar9

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