कविता – सतगुरु से बड़ा कोई मीत नहीं
सतगुरु से बड़ा कोई मीत नहीं,
अरदास से बेहतर कोई गीत नहीं।
एक बार सच्चे मन से याद तो कर,
सूना जीवन भी रहेगा रीता नहीं।
दिल में श्रद्धा,नयनों में प्यार जगा,
हर पल उसका पावन नाम सजा।
जिसने सतगुरु का हाथ थाम लिया,
उसका हर अंधियारा सवेरा बना।
खुदाई से बढ़कर प्रेम का दीप जला,
हर रूह में उसका ही उजियारा मिला।
इंसानियत की राह जो अपनाएगा,
हर कदम पर उसका सहारा मिला।
फरियाद सच्चे दिल से जब भी होगी,
कृपा की वर्षा हर पल तब ही होगी।
दुख की धूप भी छांव में बदल जाएगी,
जब सतगुरु की मेहर साथ ही होगी।
नफ़रत छोड़ प्रेम का संसार बना,
हर दिल में सेवा का व्यवहार बना।
सतगुरु की वाणी जीवन का आधार बने,
यही मानवता का सबसे बड़ा उपहार बने।
— किशन सनमुखदास भावनानी
