ग़ज़ल
आपके बिन कदम लड़खड़ाने लगे।
राह के मोड़ भी अब सताने लगे।
साथ जब आप हो है हँसी ज़िंदगी।
ख्वाब सच हो मुझे गुदगुदाने लगे।
आपके नाम से है धड़कता ये दिल ।
गीत होंठों पे खुद गुनगुनाने लगे।
आपसे दूर होकर ये जाना सनम।
ज़ख़्म भीतर केफिर से सतानें लगे।
आपकी आहटों का भरोसा रहा।
हम अँधेरों में दीपक जलाने लगे।
आपकी बात जब याद आई कभी।
शुष्क नयनों में आँसू सजाने लगे।
— मंजूषा श्रीवास्तव ‘मृदुल’
