कुछ शेर
खुद पर ही दृढ़ विश्वास रखिए, मगर,
दूसरों पर आस रखना छोड़ दीजिए
जिसकी फितरत बुरी है, एक दिन पछतायेगा जरूर,
आप हाथ धोकर उसके पीछे पड़ना छोड़ दीजिए
धोखा जब खा लिया है एक बार तो,
परखे को फिर से परखना छोड़ दीजिए
इश्क़ भी एक खेल है चौसर का,
जो हारना नहीं, तो खेलना छोड़ दीजिए।
मिल रही हो आँखें तो, आंख मिलाना लाजमी है,
उनको रहता हो इंतजार, तो गली उनकी में जाना लाजमी है,
यों तो मोहब्बत में कोई कमतरी नहीं होती,
पर,पहल की हो जरूरत, तो पहल करना लाजमी है।
ना मैं आमिर, ना अमीर हूं,
तबियत से शायराना,
जिंदा जमीर हूं,
अपनापन है दिल में, किसी से वैर नहीं;
मैं जिसको सच्ची मोहब्बत रब से, वो फिदा फकीर हूं
(आमिर = तानाशाह, शासक)
— पुखराज छाजेड़
