प्रीत मिलन
मधुर स्वरों से वाणी सजी हुई, वीणा के ज्यों बजते हो तार
धुन मुरली सी कान्हा की, हर बात में छलक रहा मधु प्यार ,
बातों में हैं मनभावन शुद्ध विचार , मन हर्षित होता बार बार,
लाया जीवन में यह मधु प्रकाश ,और खुशियों के लगते अंबार ,
जब से हुआ यह प्रीत मिलन, तन रोम रोम रहता है पुलकित,
यहाँ वहां सर्वत्र तुम व्यापक, दिल पर तुम्हारा नाम है अंकित,
प्रभु की हम पर कृपा हुई,जब अजय हुआ यह घर शोभित ,
कामयाब हर दिन जीवन का , साक्षी जिसका है हर पल छिन
शत शत वंदन प्रभु चरणों में ,जीवन रहे प्रभु सेवा में समर्पित ,
— जयप्रकाश भाटिया
