बेटियों का वर्चस्व
जो राह कभी कठिन लगी थी,
आज वही “पहचान” बनी है।
आई टी आई के हर प्रांगण में,
बेटियों की नई उड़ान बनी है।
उन हाथों में अब हुनर सजा है,
आँखों में भी विश्वास जगा है।
वेल्डिंग या मशीनों की धड़कन,
हरेक क्षेत्र में परचम लहरा है।
बेटियाँ अब केवल सपना नहीं,
परिश्रम का ही साकार रूप है।
कन्या हर चुनौती को जीत रही,
यह साहस अनमोल स्वरूप है।
यहाँ रूढ़ियों की दीवारें हैं टूटीं,
बदली है सोच, बदल गए द्वार।
हर एक उपलब्धि यह कहती है—
“बेटियाँ हैं भारत का आधार।”
जब भी बेटी आत्मनिर्भर होगी,
प्रत्येक “घर” में उजियारा होगा।
श्रम, ज्ञान और आत्मविश्वास से,
भारत का भविष्य सुनहरा होगा।
आओ मिलकर सभी यह प्रण लें,
घर की हर बेटी को अवसर देंगे।
“शिक्षा, कौशल और सम्मान” से,
एक नवभारत का निर्माण करेंगे।
(संदर्भ – आई टी आई में बेटियों का बढ़ता वर्चस्व)
— संजय एम तराणेकर
