हे कवि नीरज
हे कवि !
जो गीत लिखे तुम
वो भावों के गीत लिखे
जीवन के रूप में
नये तराने लिखे
आपका जाना
एक युग का जाना
प्रेम के द्वीप जलाने वाले
आना फिर इस धरा पर
नया इतिहास फिर से दुहराना
गीतों की माला
फिर से पिरोना
तुम्हारे गीत बुला रहे हैं
नयी-नयी सुबह में
कोयल गीत गा रही है
हे कवि नीरज!
बहुत याद आते हो
— जयचन्द प्रजापति ‘जय’
