कविता *वर्षा वार्ष्णेय 08/01/202608/01/2026 बिंदी वो चाहे माथे पर होया फिर हो हिंदी मेंबिंदी हमारी शान हैबिंदी हमारी आन है भुलाकर अपनी संस्कृतिये कहाँ हम Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 23/12/202523/12/2025 मेरी उदासी सिर्फ मेरी है मेरी उदासी सिर्फ मेरी हैउससे किसी और को क्याजिंदगी में कुछ ऐसे भी लोग होते हैंकहने को हज़ारों पर अकेले Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 22/11/202522/11/2025 कविता कभी कभी दिल करता हैछोड़ दूँ वो सारी बंदिशेंजिनका न कोई रुआब हैबना दूँ कुछ नयी लकीरेंखींच दूँ कुछ नयी Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 14/10/202514/10/2025 कविता एक गमले से निकालकरदूसरे गमले में लगा दी जाती हैंउम्मीद की जाती है उनसेभूल जाएं अपनी जड़ों को बेटियों का Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 12/09/202512/09/2025 कविता एक पल में सुख लगता हैअगले ही पल दुखों का मेला हैये जीवन क्या है कौन जान पायासंघर्षों का लगता Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 20/08/202520/08/2025 कविता तेरा दुःख भी तेरा है…..तेरा सुख भी तेरा हैमगन हैं सभी आज अपनी अपनी दुनिया मेंकोई समझे या न समझे Read More
गीतिका/ग़ज़ल *वर्षा वार्ष्णेय 26/07/202526/07/2025 ग़ज़ल धुंध भरी रेत पर आंसूओं का बिछौना हैकोई नहीं तेरा साथी अकेले ही चलते जाना है क्यों करें हम किसी Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 12/07/202512/07/2025 सावन सावन में जब तुम आओ पियाखुशियों की गठरी ले आनान हों गर उनमें गहने ,चुनर महँगीथोड़ा सा वक़्त तुम ले Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 28/06/202528/06/2025 कविता एक अचम्भा मैंने सुना वक़्त कीपैसों से तकरार हो गईकीमती हूँ मैं या मेरे अपनेजरा सी बात बढ़कर रार हो Read More
गीतिका/ग़ज़ल *वर्षा वार्ष्णेय 30/05/202530/05/2025 गीतिका अहंकार की विष बेल ने कब अमृत बरसाया है ,बूढा हुआ बरगद तो क्या, छाया से अपनी महकाया है। सतयुग Read More