क्या बिना प्याज लहसुन के खाने में टेस्ट नहीं आता ?
आजकल जहाँ भी जाओ वहीं हर चीज में प्याज लहसुन पड़ा होता है । क्या पहले शादी विवाह नहीं होते थे ? क्या उस खाने में स्वाद नहीं आता था ? मुझे समझ नहीं आता कि ये कौन सा नया ट्रेंड है ? खाना ऐसा होना चाहिए कि सभी लोग खा सकें । इतनी दूर जाओ और बिना कुछ खाए वापिस आ जाओ । ऊपर से एक बात और कि आजकल तो सभी खाते हैं प्याज ,लहसुन । मैंने तो अब एक बात सोची है कि किसी के यहाँ जाने से पहले एक बात पूछनी पड़ेगी कि क्या सभी खाने में प्याज लहसुन पड़ा है या कुछ सात्विक भोजन भी है वरना हमारा आना संभव नहीं । मैं तो वैसे भी अपनी स्वास्थ्य कारणों से कहीं ज्यादा कुछ नहीं खाती लेकिन पतिदेव भी बिना खाए लौट आते हैं और फिर घर पर उनके लिए खाने का इंतजाम करना पड़ता है । मुझे लगता है एक दिन प्याज लहसुन न खाने वालों को देश निकाला दे दिया जाएगा । मुझे लगता है कि या तो हमें फिर से प्याज लहसुन खाना शुरू करना चाहिए या फिर जाना बंद करना चाहिए । क्या खाने से पहले हलवाई या केटर्स को नहीं बोलना चाहिए कि खाने में प्याज लहसुन नहीं पड़ेगा क्योंकि आज भी काफी लोग हैं जो इन चीजों से दूर रहते हैं । शादी विवाह एक सामाजिक रस्म है क्या उसमें सबके बारे में विचार करने की आवश्यकता नहीं ? आपका क्या विचार है ?
— वर्षा वार्ष्णेय

हमारे यहाँ सदियों से बिना प्याज लहसुन का भोजन बनता आया है और सभी कार्यक्रमों में ऐसा ही भोजन बनता है। आजकल हम घर पर कभी-कभी प्याज खा लेते हैं लेकिन कार्यक्रमों में बिना प्याज-लहसुन का ही भोजन बनता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ऐसा ही भोजन सात्विक और लाभकारी होता है। मुझे लगता है कि पंजाबी प्रभाव के कारण आजकल कई जगह लहसुन प्याज का भोजन बनाया जाता है। परन्तु जहाँ तक मेरी जानकारी है वहाँ भी बिना प्याज लहसुन की वस्तुएँ उपलब्ध होती हैं, जिनसे आप अपना उदर भर सकते है।। बिना भोजन किये लौट जाना उचित नहीं होता। इससे मेजबान का अपमान भी होता है। और कुछ नहीं तो आप फल-मेवा खाकर और जूस पीकर भी पेट भर सकते हैं।