व्यंग्य
तुम कहते हो कि पैसा जरूरी है
लेकिन सबसे ऊपर नहीं
मैं कहती हूँ इस दुनिया में पैसा है
तो रिश्ते हैं वरना
आपकी दुनिया वीरान है
अरे इस पैसे के लिए पति
पत्नी को भुला देता है
बाप बेटी को भूल जाता है
भाई भाई से दुश्मनी कर लेता है
बच्चे माँ -बाप को भूल जाते हैं
पत्नी पति को छोड़ देती है
सोशल मीडिया गवाह है
आज रिश्तों की सच्चाई का
समाज में फैल रही गंदगी की
कौन परवाह करता है आज रिश्तों की
किसको प्रेम है आज अपनों से
सब भाग रहे हैं पैसों के पीछे
क्योंकि आज पैसा ही आपका रिश्तेदार है
जिस समाज में आज पैसा ही
खुशियों की बुनियाद बन चुका हो
वहाँ सारे नियम कायदे कानून
कब के ताक पर रखे जा चुके हैं
क्योंकि आज प्रेम का स्थान
निचले पायदान पर पहुँच चुका है
सभी को नाम ,शोहरत ,दिखावे से प्रेम है
क्योंकि प्रेम आपको सुदामा बना देगा
और आज यहाँ किसी को सुदामा की नहीं
शान शौकत की देवी लक्ष्मी की जरूरत है
— वर्षा वार्ष्णेय
