गीतिका/ग़ज़ल *वर्षा वार्ष्णेय 16/03/202627/03/2026 गीतिका दुनिया की भीड़ में कहीं खो गई सी लगती हूँजाना था कहाँ, भीड़ में फँस गई सी लगती हूँआवारा झुंड Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 25/02/202625/02/2026 व्यंग्य तुम कहते हो कि पैसा जरूरी हैलेकिन सबसे ऊपर नहींमैं कहती हूँ इस दुनिया में पैसा हैतो रिश्ते हैं वरनाआपकी Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 08/01/202608/01/2026 बिंदी वो चाहे माथे पर होया फिर हो हिंदी मेंबिंदी हमारी शान हैबिंदी हमारी आन है भुलाकर अपनी संस्कृतिये कहाँ हम Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 23/12/202523/12/2025 मेरी उदासी सिर्फ मेरी है मेरी उदासी सिर्फ मेरी हैउससे किसी और को क्याजिंदगी में कुछ ऐसे भी लोग होते हैंकहने को हज़ारों पर अकेले Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 22/11/202522/11/2025 कविता कभी कभी दिल करता हैछोड़ दूँ वो सारी बंदिशेंजिनका न कोई रुआब हैबना दूँ कुछ नयी लकीरेंखींच दूँ कुछ नयी Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 14/10/202514/10/2025 कविता एक गमले से निकालकरदूसरे गमले में लगा दी जाती हैंउम्मीद की जाती है उनसेभूल जाएं अपनी जड़ों को बेटियों का Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 12/09/202512/09/2025 कविता एक पल में सुख लगता हैअगले ही पल दुखों का मेला हैये जीवन क्या है कौन जान पायासंघर्षों का लगता Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 20/08/202520/08/2025 कविता तेरा दुःख भी तेरा है…..तेरा सुख भी तेरा हैमगन हैं सभी आज अपनी अपनी दुनिया मेंकोई समझे या न समझे Read More
गीतिका/ग़ज़ल *वर्षा वार्ष्णेय 26/07/202526/07/2025 ग़ज़ल धुंध भरी रेत पर आंसूओं का बिछौना हैकोई नहीं तेरा साथी अकेले ही चलते जाना है क्यों करें हम किसी Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 12/07/202512/07/2025 सावन सावन में जब तुम आओ पियाखुशियों की गठरी ले आनान हों गर उनमें गहने ,चुनर महँगीथोड़ा सा वक़्त तुम ले Read More