कुण्डली/छंद

घनाक्षरी

बाल वृद्ध राख भान, हाथ थाम ले सुजान, ढूँढते अधीर नैन, प्रेम भाव चाहते।।

भक्ति शक्ति रूप देव, छाँव ठाँव हैं अनूप, धीर धारिता अतीव, छत्र नेह तारतें।।

कृष्ण गान रास रंग, गोपियां रमी सु रंग, रेख प्रीत मीत साज, सृष्टि को निहारते।।

चंद्र तारिका प्रकाश, छत्र नील वास ईश, भाव श्रेष्ठ हो उजास, भक्त पीर जानते।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८