अरुण छंद
कौन है, चाहता, नाश हो जोश का।
दे नशा, छल करें, हौसला होश का।।
देश को लूटते, भ्रमित मन हैं युवा।
आड ले, धर्म की, मोड़ते हैं हवा।।
राजसी, थाट हो, हर हृदय कामना।
भाल पर, तिलक हो, मान की भावना।।
एक हो, साथ हो, परम प्रभु साधना।
मंगला, हो सदा, पुण्य आराधना।।
