जल्दबाजी नहीं, विवेक से निर्णय लें
मानव के व्यावहारिक जीवन में अनेक बार ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होती है जहां उस विशेष अनियोजित परिस्थितियों में अचानक ही
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Read Moreअरे नंदू! आखिर तूने मार ही डाला तीन बेटियों को। तुम्हारा कलेजा नहीं कांपा। इन बेचारी ने क्या बिगाड़ा था।
Read Moreकभी-कभी जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष बाहर नहीं, भीतर शुरू होता है—जहाँ निर्णयों की भीड़ में आत्मविश्वास मौन हो जाता
Read Moreवर्तमान में पिताओं में जो परिवर्तन परिलक्षित हुआ हैं। वह एक साहसिक और खुागवार पहलू है। साहसिक उस परिदृश्य को
Read Moreभारतीय मध्यम वर्ग को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यही वर्ग उपभोग, बचत, निवेश, शिक्षा, आवास और
Read Moreकिसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके प्राकृतिक संसाधनों या भौतिक संपदा में नहीं, बल्कि उसकी मानव पूंजी में निहित
Read Moreकिसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके नागरिकों की शिक्षा, जागरूकता और सहभागिता पर निर्भर करती है। जब समाज का आधा
Read Moreसमय का पहिया निरंतर घूमता रहता है। जीवन का हर चरण अपने साथ नई चुनौतियाँ, अनुभव और जिम्मेदारियाँ लेकर आता
Read Moreआजकल टेलीविजन पर अक्सर एक विज्ञापन देखने को मिलता है यह विज्ञापन वर्तमान पीढ़ी की बदलती मानसिकता और हमारे पारिवारिक
Read Moreवैश्विक स्तरपर भारतीय समाज में सदियों से गृहिणी को परिवार की धुरी माना जाता रहा है,किंतु विडंबना यह है कि
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