सामाजिक

विकलांगता

सन 1981 से प्रतिवर्ष 3 दिसंबर को अन्तर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस मनाया जाता है। अगर कहें कि इस दिन को “विकलांगता उत्सव“ कहा जाए तो निश्चित ही अनेक लोगों को इस पर आपत्ति होगी, मगर यही सच है। ऐसा सच जो विकलांगों की बैशाखियों के सहारे धीरे-धीरे चलकर अधिकारियों के लिए उत्सव बन जाता है। विकलांग […]

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वाह रे अकड़बाज

कुदरत ने इस खूबसूरत सृष्टि में मानव काया की अनमोल रचना कर उसे कुशाग्र बुद्धि क्षमता के रूप में अनमोल अस्त्र सौंपा है! तो गुरूर, अभिमान, अहंकार, अकड़, अहंवाद, गुमान, नखरो जैसी अनेक विशुद्धयां भी डाली है, ताकि मानवीय जीवन यात्रा में अच्छे काबिल और उचित लोग उस उचित स्थान याने मंजिल तक पहुंच सके […]

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बने विजेता वो सदा

दुनिया को केवल इस बात की परवाह है कि हम क्या करते हैं, न कि हम क्या कहते हैं कि हम क्या करेंगे। जो शब्द हम आम तौर पर कहते हैं, वे हमारे द्वारा किए जाने वाले कार्यों की तुलना में बहुत कम महत्व रखते हैं। हमें बोलना कम और काम ज्यादा करना चाहिए। यह […]

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शिक्षा मानव बौद्धिक क्षमता का विकास करने की प्राथमिक सीढ़ी

वैश्विक रूप से मानव बुद्धि का लोहा आज हर स्तर पर सशक्त और काबिले तारीफ़ माना जा रहा है,जिसने दशकों पूर्व किसी ज़माने में पैदल चलने वाले, प्राकृतिक पत्तों और चीजों से तन ढकने वाले और जंगलों में जीवन यापन कर खाद्य जुटाने वाले मानव को न सिर्फ केवल आज के डिजिटल दौर में पहुंचा […]

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ओए पापा, बड्डी,यार मान जा न

जैसा कि शीर्षक को पढ़ने से ही समझ आ रहा है कि यह वाक्य या वाक्यांश किसी बच्चे द्वारा अपने पिता के लिए बोला गया है, जिसमें बच्चा अपनी किसी बात को मनवाने के लिए अपने पिता से आग्रह कर रहा है। इस तरह के अनेक वाक्य हम सभी के घरों में अक्सर सुने जा […]

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याचना करें तो केवल ईश्वर से

मनुष्य का पूरा जीवन ऐषणाओं का पूरक और पर्याय रहा है जहाँ हर किसी को कुछ न कुछ कामना ताजिन्दगी बनी ही रहती है। इसके सकारात्मक और नकारात्मक, वैयक्तिक अथवा सर्वमांगलिक प्रकार हो सकते हैं लेकिन इच्छाओं और तृष्णाओं का सागर हर पल लहराता ही रहता है। कोई-कोई बिरला ही होगा जो संसार में आने के […]

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यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता: – क्या यही है वास्तविकता?

जहांँ नारी की पूजा की जाती है वहांँ देवता निवास करते हैं पर क्या सच में हमारा देश नारी की सच्चे मन से पूजा करते हैं? क्या नारी को वह दर्जा हासिल है जिसकी वह हकदार है? सदियों की ब्रेनवाशिंग से स्त्रियाँ यही मानने लगी है कि वह पुरुषों से कमतर है और यही सोच […]

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नए वर्ष में दुख और परिश्रम के महत्व को समझें

भारत में हमने आदि काल से ही बड़े बुजुर्गों, ज्ञानियों, विद्वानों से अनेक कहावतें, अल्फाज, तकरीरें, समझाइश इत्यादि से अनेक उनकी पंक्तियां, सुझाव,विचारों को सीधे वार्तालाप या किताबों में दर्ज अमूल्य पंक्तियों के माध्यम से पढ़े सुने होंगे कि, जिंदगी कबड्डी के खेल समान है, सफलता की लाइन टच करते ही लोग टांग खींचने लगते […]

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अनुभव जिंदगी से कमाया हुआ फल

मानवीय जीवन में प्रत्येक मनुष्य में अनुभव की ऐसी अनेक विशेषताएं पाई जाती है जिसके बल पर समाज राष्ट्र में उनका आंकलन सकारात्मक और नकारात्मक रूप से किया जाता है। मसलन, कोई मनुष्य इमानदार, महत्वकांक्षी,परोपकारी  सेवाभावी,अनुभवी इत्यादिसैकड़ों सकारात्मक विशेषताएं हो सकती है और अपराधी, गुस्सैल, चिड़चिड़ा, बेईमान, चोर उचक्का, लफंगा इत्यादि सैकड़ों नकारात्मक विशेषताएं हो […]

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स्वतंत्रता को स्वच्छंदता मत समझो

समय के चलते स्वतंत्रता को अपना नैतिक हक समझने वाली आजकल की पीढ़ी स्वच्छंदता का अंचला ओढ़े मनमानी कर रही है। या यूँ कहे कि, माँ-बाप के बनाए हुए दायरे को तोड़ कर आज़ाद ज़िंदगी जीने की होड़ में बर्बादी के पथ पर चल पड़ी है। खासकर लड़कियाँ अपने आप को बहुत एडवांस और होशियार […]