सामाजिक

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नौकरीपेशा महिलाएं : दोहरी जिम्मेदारियों के साथ जीवन की दौड़ 

आज के आधुनिक समाज में नौकरीपेशा महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। वे न केवल घर का रखरखाव

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अलमारी में सजी हुई किताबें घर के बौद्धिक स्तर और संस्कारों को दर्शाती हैं

आज हम उस युग में जी रहे हैं जिसे ‘डिजिटल क्रांति’ का नाम दिया गया है। सूचना का विस्फोट कुछ

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अपने सामूहिक दायित्वों से दूर होता समाज : टूटता सामाजिक ताना-बाना और बिखरती भागीदारी

भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता सदियों से उसकी सामूहिकता रही है। परिवार, पड़ोस, ग्राम और नगर—हर स्तर पर लोग

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