लघुकथा

स्थान

 शाम के धुंधलके में दरवाजे पर कोई साया नजर आया बाबुलालजी अपना चश्मा पहनते हुए पूछा “कौन है दरवाजे पर?” मोहित ने अन्दर आते हुए कहा “सर मैं हूं मोहित !” “कौन मोहित?” “सर मैं आपका स्टूडेंट् हूं!” “अच्छा -अच्छा ” बाबूलालजी ने कुछ सोचते हुए कहा। “मोहित थोड़ा बैठक की लाईट जला देना !” […]

कविता

एहसास

सब की ख्वाहिशो का रखती हो ख्याल कभी कोई तेरा भी कर ले ख्याल! जन्मदिन होता है सभी का खास कोई तेरा भी जन्मदिन रख लें याद ! सारी उम्र सेवा करती रही सभी की तेरी तिमारदारी कोई कर लें आज ! हमेशा लाड़ लुटाती रही सभी पर थोड़ा लाड़ तेरा भी कर ले कोई […]

कविता

समर्पित

नाउम्मीद होते  आंखो से टकटकी लगाए देख रहे हैं रस्ता अपनों का बड़े लाड़ से पाला था जिनको असंख्य अभिलाषा पूर्ण किए जिसके आज भूले बैठे हैं वो उनको ! धुंधली आंखें,थकती सांसें बड़े बेबसी से याद करते अपने आंखों के तारों को दिल में मिलने की चाह लिए हर दिन देखें राह उनकी जाने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आपकी यादों के काफिले आपकी वादों की महफिलें ! यूं ही मचलती रही ख्वाहिशें रात भर चलते रहे सिलसिले ! आप खफा जो हुए मुझसे रूठी मुझसे मेरी तक़दीरे ! है हमारे दरम्यान अब रंजिशे नहीं बची अब कोई उम्मीदे ! मैंने निभाई इश्क की सभी रवायतें आपने क़ायम किए वफ़ा की मिसालें! थी हमारे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हसरतों की बात न पूछो यहां उम्र कम होती गई, हसरतें बढ़ती गई!  करार जितना ढूंढते रहे यहां  बेकरारी उतनी बढ़ती गई वफादारी तो मानो यहां बस किताबों में सिमट गई चालबाजी के माहौल में यहां मासूमियत कहीं खो-सी गई इंसान और इंसान के बीच यहां इंसानियत कहीं गुम-सी हो गई किस-किस का हाल कहे […]

कविता

शीर्षक सर्दियों के दिन रात

सिहरने लगी है ये शाम जरा रात भी है कुछ अलसाई-सी ओस की बूंदों से सराबोर कोहरे के चादर लपेट आई है भोर कंपकंपाती हुई सर्दियों की सर्द हवाएं लगी है शरीर को कंपकंपाने धूप ने थोड़ी राहत दिलाई धूप का पीछा करते हम सारा दिन गुजारे सर्दियों में खाना सोना बड़ा सुहाए कोई काम […]

लघुकथा

तबादला

शाम को दफ्तर से आते ही राकेश ने कहा “सामान बांधना शुरू कर दो हमारा तबादला हो गया।” तबादले का नाम सुनते ही स्नेहा की घबराहट शुरू हो जाती है। फिर से एक-एक सामान बांधों और चल दो किसी नए शहर को। देहरादून आए अभी एक ही साल तो हुआ, और तबादले का आर्डर आ गया। शुरू […]

कविता

जिंदगी

यूं ही किसी मोड़ पर तुम से मुलाकात हो जिंदगी थोड़ी शिकायत मेरी हो थोड़े सवालात तुम्हारे मेरी शिकायत दर्ज  ना हो न सही बस थोड़ा गौर जरूर फरमा लेना तुम्हारे सवालों के जवाब न हो मेरे पास फिर भी सवाल जरूर करना जिंदगी ! शिकायते ख़त्म हो जाएगी एक रोज जवाब भी मिल जाएंगे […]

गीतिका/ग़ज़ल

अंधेरा क्यों है?

रोशन घरों के कोने में अंधेरा क्यों है खुशियों में भी ग़म की परछाईं क्यों है? मुस्कुराहट तो हर वक्त खिली रहती है होंठों पर फिर भी चेहरे पर खुशी की झलक कम क्यों है? ऐ आसमां तेरे दामन में है चांद सितारे सभी फिर भी तेरा आंगन सूना-सूना क्यों है? जिधर देखो उधर लोग […]

कविता

एक बहाना जीने का

एक बहाना तो दो जीने का मरने के तो कई बहाने है। एक तराना तो छेड़ो जिंदगी का मौत के तो कई अफसाने है। मंजिलें मिले न मिले मनचाही ख्वाबो से भरे रास्ते तो हो। परख लिया लोगों को हर कदम पर थोड़ी आजमाईश अपनी भी हो। बहुत हो गई असफलता की टीस सफलता के […]