गज़ल
हर जड़ से उखाड़ गया हूं मैंये न पूछ कहां-कहां से निकाला गया हूं मैं ! लोगो ने कहा तेरा
Read Moreबदले हुए तेवर है जमाने केइश्क है बस नाम के अफ़साने में ! ना जरा इंसानियत है बाकीयही दस्तूर है
Read Moreएक दिन यूं हो जाएगाये जहान जन्नत हो जाएगाजब इंसान का नामोनिशानमिट जाएगा इस जहान से ! पेड दरख्त नदी
Read Moreअंशु ने अभी-अभी अपने ससुराल की दहलीज पर कदम ही रखा था तभी धीरज की बुआ ने कहा ” बहु
Read Moreदर्द का हद से गुजर जाना दवा बन जाता है!समय के बाद मिला दवा जहर बन जाता है!! जुर्म का
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