बदले हुए तेवर
बदले हुए तेवर है जमाने केइश्क है बस नाम के अफ़साने में ! ना जरा इंसानियत है बाकीयही दस्तूर है
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Read Moreएक दिन यूं हो जाएगाये जहान जन्नत हो जाएगाजब इंसान का नामोनिशानमिट जाएगा इस जहान से ! पेड दरख्त नदी
Read Moreअंशु ने अभी-अभी अपने ससुराल की दहलीज पर कदम ही रखा था तभी धीरज की बुआ ने कहा ” बहु
Read Moreदर्द का हद से गुजर जाना दवा बन जाता है!समय के बाद मिला दवा जहर बन जाता है!! जुर्म का
Read Moreउम्र गुज़री है जिसकी सरमाई मेंमौत भी आए उसके परछाई में ! अक्सर हम सोचते हैं तन्हाई मेंतुम बस गए
Read Moreवक्त की रफ्तार है बड़ी तेजलेकिन वक्त हमारा बदल रहा नहीं!दिन महीने साल गुजर रहेलेकिन खुशियां न मेरे हाथ लगी!अनन्त
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