सामाजिक

असफ़लता कोई कलंक नहीं बल्कि एक ‘सबक़’ है

​आज के अति-प्रतिस्पर्धी और दिखावे से भरे युग में मनुष्य एक ऐसी अंतहीन दौड़ का हिस्सा बन गया है, जहाँ वह अपनों से आगे निकलने के प्रयास में स्वयं को ही पीछे छोड़ता जा रहा है। वर्तमान समय में जहाँ सफ़लता को केवल धन और पद से मापा जाता है, वहाँ यह समझना अनिवार्य है कि सफ़लता दुनिया को आपका परिचय करवाती है, लेकिन असफ़लता आपको दुनिया और स्वयं के वास्तविक स्वरूप का परिचय देती है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि हार जीवन का अंत नहीं, बल्कि वह ठोस धरातल है जिस पर अनुभव की नींव रखी जाती है। जब हम विफ़ल होते हैं, तो समाज और रिश्तों के असली चेहरे बेनकाब होते हैं, और यही वह क्षण होता है जब हमें अपनी आंतरिक शक्ति और धैर्य का बोध होता है।

​असफ़लता एक महान शिक्षक है,जिसे हम हार मान लेते हैं, वह वास्तव में प्रकृति द्वारा दिया गया एक ‘सुधार का अवसर’ है,यह हमें अपनी रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने और अधिक मज़बूती के साथ खड़े होने के लिए प्रेरित करती है।

​नकारात्मकता का त्याग, असफ़लता कोई कलंक नहीं बल्कि एक ‘सबक़’ है जो हमारे चरित्र को गढ़ने वाली भट्टी की तरह काम करती है, ताकि हम भविष्य की बड़ी चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

​वर्तमान में जीने की कला भविष्य की चिंताओं और बीती हुई असफ़लताओं के बोझ के बीच हम अक्सर ‘आज’ की सार्थकता को भूल जाते हैं।

जीवन का असली आनंद केवल वर्तमान क्षण को पूरी जागरूकता के साथ जीने में ही निहित है।

​दिखावे बनाम यथार्थ, सोशल मीडिया के इस दौर में हम दूसरों की ‘सफ़ल’ छवियों से अपनी तुलना कर अवसाद से भर जाते हैं, जबकि सत्य यह है कि हर व्यक्ति का अपना संघर्ष और अपनी यात्रा होती है।

​रिश्तों की ऊष्मा और संवेदनशीलता  विपत्ति के समय जो हाथ आपका साथ थामते हैं, वे ही आपके जीवन की असली पूंजी हैं, भौतिक सुख-सुविधाएं तो आती-जाती रहेंगी, लेकिन मानवीय संवेदनाएं ही जीवन को गरिमा प्रदान करती हैं।

​आत्म-साक्षात्कार की आवश्यकता, प्रतिदिन कुछ समय स्वयं के साथ बिताएं ताकि आप भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय अपनी मौलिकता को पहचान सकें, जो व्यक्ति अपने भीतर शांत है, उसे दुनिया का कोई भी शोर विचलित नहीं कर सकता।

​परोपकार और उदारता, सच्चा ज्ञान और सच्ची सफलता वही है जो आपको अभिमानी नहीं बल्कि और अधिक विनम्र बनाए,दूसरों के आंसुओं को पोंछने की क्षमता ही मनुष्य को महामानव बनाती है।

​पुनर्निर्माण का संकल्प हर असफ़लता के बाद उठना और पहले से बेहतर बनने का प्रयास करना ही जीवन की जीवंतता का प्रमाण है, याद रखें कि रुका हुआ पानी सड़ जाता है, जबकि बहती हुई नदी ही अपनी मंजिल तक पहुँचती है।

​ हमें जीवन को केवल एक लक्ष्य पाने का साधन नहीं, बल्कि एक उत्सव की तरह देखना चाहिए। चाहे सफ़लता का शिखर हो या असफ़लता की गहरी खाई, दोनों ही स्थितियाँ हमें परिपक्व बनाने के लिए आती हैं। अपने अनुभवों को अपनी शक्ति बनाएं, वर्तमान का सम्मान करें और निस्वार्थ भाव से कर्म करते रहें, क्योंकि अंततः वही जीवन सार्थक है जिसने दुनिया को कुछ बेहतर दिया हो और अपने भीतर शांति की अनुभूति की हो।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।