ग़ज़ल
दे रहे किसको ये धोखा बताओ, अंधों कोनाज़ कुछ ज़्यादा ही है पुते हुए चेहरों को शहर में बिकने लगी
Read Moreजन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से डॉ डी एम मिश्र के नये ग़ज़ल संग्रह ‘सच कहना यूॅं अंगारों पर
Read Moreआ धमके साले-बहनोई होली मेंबजट कर गया साफ़ रसोई होली में फागुन ने सबको मतवाला कर डालालगता नहीं पराया कोई
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