रक्षक ही बन बैठे भक्षक
जिस थाने में सुरक्षा की उम्मीद ले आई,वहीं इंसानियत शर्मसार करने हो आई।जिस वर्दी पर विश्वास जताया था उसने,उसी ‘वर्दी’
Read Moreजिस थाने में सुरक्षा की उम्मीद ले आई,वहीं इंसानियत शर्मसार करने हो आई।जिस वर्दी पर विश्वास जताया था उसने,उसी ‘वर्दी’
Read Moreआगे पीछे खड़ी है यहाँ मौत ।बारूद बन गई जीवन की सौत ॥कहाँ पे ले जा रहा है ये जमाना
Read Moreसमय बड़ी जल्दीउम्रदराज़ हो जाता है।भोर में वह किसी नवजातस्वप्न की तरह आँखें खोलता हैकोमल, कमसिन,ओस मेंभीगी कच्ची कली-सा। फिर
Read Moreआज गली-गली दीपों की पंक्ति सजी है,आँगन में फिर खुशियों की धून बजी है ;लेकिन मन के सूने कोने में
Read Moreलेखक से ही माँगते, पुस्तक छपने दाम।फिर लेखक से कह रहे, पाठक जुटें तमाम॥ लेखक लेखक पढ़ रहे, लेखक ही
Read Moreअभी मैं बिस्तर पर जाने की सोच ही रहा थाकि दुश्मन की तरह दुश्मन की तरहमित्र यमराज आ गए आ
Read Moreमन के दशानन से लड़ता भीतर का रामहमारे भीतर भी एक राम है,जिसका धनुष टूटा हुआ, तीर बिखरे हुए,और सामने
Read Moreमैं सेल्फ़ी हूँ, या सेल्फ़ी हूँ मैंसमझ न आए मुझको कुछ बात,खाना-पीना होता रहेगा,सेल्फ़ी से कटते दिन-रात।सेल्फ़ी को जुनून है
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