पद्य साहित्य

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जंग में  रुख नहीं  भूलकर मोड़नाहौसला एक पल भी नहीं  छोड़ना आमजन कोभला क्यूँ लड़ाती फिरेकाम  सरकार का  देश को जोड़ना राज़को राज़रखनाकिसी काभी होयार भाँडा किसी  का

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गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

रात  ने  कुछ  तो कहा हैसुब्ह  से  ही  अनमना है ये सनातन‌  सिलसिला हैज़ुल्म दलितों पर हुआ है काम जिसने भी किया हैबस  उसी का  दबदबा है हलचलें कहती

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