जाति जाती नहीं
कितनी सदियाँ बीत गईं, पर घाव अभी भी ताज़ा है,इंसान से पहले यहाँ अक्सर उसका जाति पूछा जाता है।बराबरी की
Read Moreकितनी सदियाँ बीत गईं, पर घाव अभी भी ताज़ा है,इंसान से पहले यहाँ अक्सर उसका जाति पूछा जाता है।बराबरी की
Read Moreचेहरे की चमक पलभर में,समय कभी भी हर लेता है,चरित्र का उजियारा लेकिन,युग-युग तक साथ रहता है।रूप नहीं, व्यवहार बताता,इंसान
Read Moreरोज मिल रहे हैं बस नए-नए ज़ख्म,किसे कहें अपना दर्द खुलकर हम,आम आदमी तो टूट रहा है हर दिन,दैनिक जीवकोपार्जन
Read Moreकिसी की जमीर परलात-घूसा मत मारोउम्र में छोटा हैकमजोर समझ करतीर मत चलाओबच्चा समझकरमां को अपमानित करोगेसत्ता का चाबुक चलाओगेज्यादती
Read Moreनन्हे-नन्हे पाँव में,चंचलता की धूप।घर-आँगन महका उठे,हँसी बने स्वरूप॥ कूदें, नाचें, गुनगुनाएँ,भरें खुशी के रंग।भोले मन की खिलखिली,सबसे प्यारा ढंग॥
Read Moreजंजीरें यदि न कट सकें, बदलो अपनी चाल।लंगड़ाकर चलना भला, मत स्वीकारो जाल॥ बंधन चाहे लाख हों, मत खोना विश्वास।हिम्मत
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