ग़ज़ल
एक लड़की कि फिर खोजती रह गई,क्या ख़ता है मेरी सोचती रह गई। रोज़ दर की तरफ़ देखती रह गई,एक
Read Moreचंदा सँग है चंद्रिका, तारों की बारात। बिखरी भू पर चाँदनी, शरद पूर्णिमा रात।। शरद पूर्णिमा रात , मातु लक्ष्मी
Read Moreआओ हम संकल्प करें, दीपावली के पावन पर्व में, नेह दीप हर घर जलें, प्रेम गंग हर दिल में बहें।।
Read Moreकलरव मधुर विहंग का, साध रहा सुर ताल। आम्र मंजिरी से लदी, अमराई में डाल।। अमराई में डाल, महकती मन
Read Moreमाँ आँचल शुचि छाँव, पिता सुख सागर। गुरु शिक्षा सुखधाम, ज्ञान की गागर।। अपनों का स्नेह, प्रेम रस धारा। जीवन
Read Moreचाहे हो वह चीन या, हो वह पाकिस्तान।अंधा अगर यकीन हो, ले लेता है जान॥ मीठे बोलों में छिपे, कितने
Read Moreचलो कोशिश करते हैं,आंख मूंदने की,नींद ढूंढने की,कि शायद आ जाये,दया दिखा जाये,क्योंकि अपनी हरकतों सेइसे गंवा चुका हूं,कर्ज़ बढ़ा
Read Moreदीप जलता है खुद को जलाकररोशनी देता है सबको बिखेर।खुद के अंधकार को दूर करदूसरों को रास्ता दिखलाकर। किसी और
Read Moreतुम यूँ ही खिलो, मैं प्रीत बुनूँ,भर आँचल में छवि तेरी चुनूँ।तू हृदय में ही मेरे मोहन है बसा,तुझे धड़कन
Read Moreएक दीवाली ऐसी भी होजल उठे जब मन की ज्योति भीजहाँ में कहीं न कोई गरीबी होहर हाथ खुशी की
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