क्षमा विधा- ग़ज़ल चलो कुछ यूँ अपने सत्य को स्वीकारते हैं,ज़िन्दगी को अपनत्व से भरते हैं। किसी को पुरस्कृत नहीं
Read Moreक्षमा विधा- ग़ज़ल चलो कुछ यूँ अपने सत्य को स्वीकारते हैं,ज़िन्दगी को अपनत्व से भरते हैं। किसी को पुरस्कृत नहीं
Read Moreजो योग्य नहीं,उसे भी सम्मान दिया करो,अपने संस्कारों का सदा मान रखा करो,दूसरों की कमी से अपना स्तर मत गिराओ,अपने
Read Moreअगर सत्य हो बोलना, झटपट बोलो यार,पर असत्य के बोल से, प्रथम सोच सौ बार। फुदक फुदक चलते रहे, पक्षी
Read Moreचेक बाउंस की कहानी ने, नया मोड़ लिया है,राजपाल के हिस्से में, सुको ने मौका दिया है।दो हफ्तों में भरो,
Read Moreहो सके तो समय पर प्रहार कीजिए,सामाजिक मुद्दों पर पुनः विचार कीजिए,हमारी सारी कवायदें अधूरी हैं,अगर मिटती नहीं सबकी मजबूरी
Read Moreचंचल बारिश अब आकरटीस दिल में जगा गईबिरहन फिर से मचल उठीनीर भी आग लगा गई। बैठी नदी के कूल
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