किशोर की ललकार
किसी की जमीर परलात-घूसा मत मारोउम्र में छोटा हैकमजोर समझ करतीर मत चलाओबच्चा समझकरमां को अपमानित करोगेसत्ता का चाबुक चलाओगेज्यादती
Read Moreकिसी की जमीर परलात-घूसा मत मारोउम्र में छोटा हैकमजोर समझ करतीर मत चलाओबच्चा समझकरमां को अपमानित करोगेसत्ता का चाबुक चलाओगेज्यादती
Read Moreनन्हे-नन्हे पाँव में,चंचलता की धूप।घर-आँगन महका उठे,हँसी बने स्वरूप॥ कूदें, नाचें, गुनगुनाएँ,भरें खुशी के रंग।भोले मन की खिलखिली,सबसे प्यारा ढंग॥
Read Moreजंजीरें यदि न कट सकें, बदलो अपनी चाल।लंगड़ाकर चलना भला, मत स्वीकारो जाल॥ बंधन चाहे लाख हों, मत खोना विश्वास।हिम्मत
Read Moreमत करना इंतज़ार तू, कोई आए साथ।खुद ही अपनी शक्ति बन, खुद लिख अपनी बात॥ पिता, बंधु या संगिनी, दें
Read Moreएतवार अब टूट रहा शादी के बंधन से सात की क्या कहें एक जन्म का बंधन ही भारी हो रहा
Read Moreबरसात में न बरसा पानी, ये क्यों है,बादल भी सर पे मगर विरानी क्यों है। मिट्टी ने ओढ़ रखी है
Read Moreहमने जिसको अपना समझा, विश्वास जताया,लूट रहे अपनों को अपने, देख कर मन घबराया।जिन लोगों से बात करी थी, सबसे
Read Moreमौन अधर पर था कभी, नयनों में थी पीर।अब स्वर बने बोलती, बदली खुद तक़दीर॥ बंधन जितने बाँधते, उतनी बढ़ती
Read Moreनिहार रहा था वह, अश्वत्थ की झूलती डाल।अनिल-झंझा के संग, जो मिला रही थी ताल।।उत्पन्न, पल्लवित जिस पर, पर्ण हुआ
Read Moreहृदय के भीतरन जाने कितने ब्रह्मांड बसते हैं।विचार कभी ग्रह बनकरपरिक्रमा करते हैं,कभी टूटते तारों-सेबिखर जाते हैं। कुछ स्मृतियाँ चाँद
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