शिकायत
वह कभी प्रेम का इज़हार नहीं करता था,पर शिकायतों का कोई अवसर नहीं छोड़ता था। तब समझ में आया,कभी-कभी प्रेम
Read Moreचिंतन से चित्त हो अशांतमन रहने लगे क्लांतएकाकीपन रास आने लगेरातें लंबी हो डराने लगेहर आहट पर मन घबराने लगेकुंठा
Read More(यादें शेष : सुमन कल्याणपुर)स्वर की सरिता में मधुर गीतों से घुलता ‘प्रेम’ निराला,कोमल तानों की पहचान, ‘सुमनजी’ का अद्भुत
Read Moreचलन बहू का क्या कहूं, फूटी है तकदीर।घर में मुझको मिल गई, बेढंगी तस्वीर।।१. घूंघट में थी सादगी, उसे बताएं
Read Moreशिक्षा थी संस्कार की, ज्ञान-ज्योति का धाम।अब बाजारों में बिके, उसका पावन नाम।। विद्यालय के द्वार से, घटता अब विश्वास।कोचिंग
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