कविता

सब कुछ कुर्बान कर आये

मेरे भाई कलाई के राखी की, लाज काहे तुम रख नही पाये। भाभी को  देकर  सिंदूर  दान, दान सिंदूर का कर तुम आये। पापा के बहते आँसू पत्थर हो, हृदय को तो वो छय कर जाये। माँ तो फिर बस माँ होती भाई, कोख सुनी कर क्यूँ चले आये। मुनिया के गुड़िया  की  चूनरी, लेकर […]

कविता

नारी ने कीमत चुकायी है

आजादी से आजादी तो बस वहसी दरिंदो ने ही  पायी  है जिसकी कीमत भरें बाजारों चौराहो में नारी ने चुकायी है तानों के बाणों को बचपन से बूढ़ी होने तक मैं तो झेली हूं रहती रही सदा सबके बीचों में पर  अक्सर मैं  अकेली  हूं सहमी सहमी सी डरी डरी सी जीकर भी मैं  मर […]

गीत/नवगीत

साल मुझे फिर याद आ गया

साल मुझे फिर याद आ गया यादों में बीत गया पूरा साल तो रुप बदल  क्यूँ  सामने आ गया कल को काल में समाहित कर उद्द्भव का नया आज आ  गया सूरज क्यूँ अपनी चांद छिपाकर लालिमा ले देखो साथ आ गया आने को तब सब आने  लगे  है वो साल मुझे फिर याद आ […]

गीत/नवगीत

कब ये दूरी हो गई

पास रहते  ना  जाने  कब  ये दूरी  हो गई ना जाने क्यूँ ये कहानी फिर अधूरी हो गई समय के फेरों में  न जाने  फंसते  ही  गये फंसा   क्या  कहें   उसमे  धंसते   ही  गये छल के दलदल  से मुझपे  कीचड़  उछाले जो आजतक न  जाने क्यूँ  नही धुलते गये धूप पड़ी पुरानी धूल पे वो  […]

भजन/भावगीत

जग तारण गणपति

पूजा पाठ कर शीश झुकाये, बेल पत्र संग गंग दुब चढ़ाये। सुमन सा मन में भाव भर के, फूलों की माला हम पहनाये।। मूषक राज के  करते  सवारी, एक दन्त देवा हो फ़रसा धारी। मार के  असुरन को विनायक, सब देवो के करते हो रखवारी।। गण के राजा तुम हो गणराज, विघ्न  विनाशक  हो महाराज। […]

गीत/नवगीत

शीश झुकाते

जल पीकर जो  हल के  लिए जल  जाते, सह जाता सबकुछ तब  शिक्षक कहलाते। अज्ञानता अंधकार कुरुप रूप   धर  आये, ज्ञान के प्रकाश पुंज को गुरु तब   फैलाते। फैलाते रौशनी जब अपने देह को  जलाते, उन गुरुओं के सामने अपना शीश झुकाते। बंजर सी धरती पर ज्ञान  हरियाली  उगाते, सूखे सारंगो पर पकड़ सौरभ वो […]

कविता

चल चौसर खेले गौरी

चल खेले गौरी आज हम चौसर, तुम्हें जितने का दे रहा हूं अवसर। तीन भुवन सह लोक  के  स्वामी, जग जीतने वाले  प्रभू  अंतर्यामी। गौरी बोली सुन ओ मेरे भोलेनाथ, खेलेंगे चौसर अपने  अपने  हाँथ। भुवन में लग गया चौसर का दांव, सूर्य देव छिपकर बैठे करते छाँव। प्रथम दांव भोले ने डमरू लगाया, हारे  […]

कविता

शहीद की व्यथा

सपनें सब परिवार के छोड़, देश पर शहीद हुवा जवान। माँ मॉन के भारत भूमी को, कर दिया उसने सब कुर्बान।। माता की हो गई कोख सुनी, राखी का भी नही रहा मॉन। भाई भाई के प्यार को तरसे, खाली रह गया सिंदूर दान।। बाप के आँसू अब सुख गये, पत्थर दिल बन गया बेजान। […]

सामाजिक

सफल होने का मूलमंत्र

इंसान को अगर हर जगह सफल होना है तो उसे इन तीन बातो का ध्यान रखना होगा। वो मुख्य तीन बातें जिसको मैने हमेशा अपने साथ रखा और आगे बढ़ा वो मुख्य तीन बातें ख्वाहिश ,यकीन , उम्मीद है इन तीन बातों को हमेशा अपने पास रखे तो उस कार्य में सफल होने के लिए […]

कविता

प्रेम

प्रेम के पथ पर मुझसे, ना चला जाए । किसी की याद में, अब ना रोया जाए।। पल पल राह निहारे , हम दिन रात। फिर उस पगली से, बात ना हो पाए।। लिख के खत उन्हें ,कैसे दिया जाए। काल मेसज से भी, बात ना हो पाए।। बन्द है कालेज ,और बन्द है ये […]